कटंगा से ग्वारीघाट के बीच में बनी एनएमटी हुई बदहाल
फैक्ट फाइल
कटंगा से ग्वारीघाट एनएमटी
लागत साढ़े चार करोड़
लंबाई तकरीबन 5.5 किमी
वर्ष, 2017 में रखी गई नीव
जबलपुर: कटंगा से ग्वारीघाट तक बनी नॉन मोटराइज्ड ट्रैक कुछ ही सालो के भीतर उजड़ चुकी है। वर्ष 2017 में तत्कालीन महापौर स्वाति गोडबोले ने भूमिपूजन कर इसके निर्माण की नींव रखी थी। करीब साढ़े 4 करोड़ की लागत से बने इस ट्रैक को 6 माह के अंदर तैयार कर लिया गया था। स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा कटंगा से ग्वारीघाट के बीच लगभग 5.5 किमी का नॉन मोटराइज्ड ट्रैक का निर्माण किया गया था। जिसकी देख रेख ना होने के कारण अब यह पूरी तरीके से बदहाल हो चुका है। आलम यह है कि इस ट्रैक पर अब जहां तहां वाहनों की पार्किंग और सामूहिक कार्यक्रमों के कनात बांधे जा रहे है। वहीं बात करें इसके फर्श की तो यह पूरी तरीके से टूट चुका है।
यह था उद्देश्य
स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा कटंगा से ग्वारीघाट सड़क के किनारे एनएमटी का निर्माण कराया गया था। जिसकी नीव तत्कालीन महापौर स्वाति गोडबोले एवं जब के सांसद राकेश सिंह व क्षेत्रीय विधायक तरुण भनोत ने रखी थी। इस पांच किलोमीटर लंबे ट्रैक का उद्देश्य बच्चों के साइकिल चलाने एवं बड़े बुजुर्गों के पैदल वॉक करने के लिए बनाया गया था। इसके अलावा सड़क के दोनों ओर नाले का निर्माण भी कराया गया था। यह शहर का पहला नॉन मोटराइज्ड ट्रैक भी था। लेकिन सात सालों के भीतर ही इस ट्रैक को अब अस्तित्व की लड़ाई लड़नी पड़ रही है।
टेंडर होने की देरी
ग्वारीघाट ही नहीं शहर के अन्य जगहों पर बनाई गई एनएमटी ट्रैक की हालत भी खस्ता हो चुकी है। इनमें न तो सफाई होती है और ना ही यहां लगे झूलों की मरम्मत की जाती है। बरसात होने पर रेत-मिट्टी ट्रैक पर भर जाती है। ग्वारीघाट ट्रैक पर लगाई गई टाइल्स क्षतिग्रस्त हो चुकी है। ट्रैक पर जगह-जगह मिट्टी के ढेर भी दिखाई देते है। ट्रैक के किनारे सौंदर्यीकरण के लिए लगाई गई लाइटें अनियमित रूप से जलती है, और रात होते ही यहां अंधेरा पसर जाता है। जानकारों की माने तो इन ट्रैक की देखरेख के लिए जल्द ही टेंडर निकाले जाएंगे।
इनका कहना है
एनएमटी में खड़े हो रहे वाहनों पर कार्रवाई की जाएगी एवं टेंडर निकाल कर इनको दुरुस्त करवाया जाएगा।
रवि राव, प्रशासनिक अधिकारी, स्मार्ट सिटी
