स्वरों की मधुर साधिका सुमन कल्याणपुर : छह दशक तक संगीत प्रेमियों के दिलों पर किया राज

स्वरों की मधुर साधिका सुमन कल्याणपुर : छह दशक तक संगीत प्रेमियों के दिलों पर किया राज

मुंबई, 01 जून (वार्ता)हिंदी फिल्म संगीत के स्वर्णिम दौर की प्रसिद्ध पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर ने अपनी मधुर, कोमल और भावपूर्ण आवाज से भारतीय संगीत जगत में विशिष्ट पहचान बनाई है। लगभग छह दशक लंबे अपने संगीत सफर में उन्होंने हजारों गीतों को स्वर देकर श्रोताओं के दिलों में अमिट स्थान बनाया सुमन कल्याणपुर का जन्म 28 जनवरी 1937 को तत्कालीन ब्रिटिश भारत के ढाका में हुआ था, जो अब बांग्लादेश में स्थित है। उनका जन्म नाम सुमन हेम्माडी था। उनके पिता शंकर राव हेम्माडी कर्नाटक के उडुपी जिले के कुंडापुर तालुक स्थित हेम्माडी गांव के एक सारस्वत ब्राह्मण परिवार से थे। वे सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में उच्च पद पर कार्यरत थे और लंबे समय तक ढाका में पदस्थ रहे।उनकी माता सीता हेम्माडी थीं। परिवार में कुल पाँच बहनें और एक भाई था, जिनमें सुमन सबसे बड़ी थीं। वर्ष 1943 में उनका परिवार मुंबई आ गया, जहाँ उनकी शिक्षा और संगीत प्रशिक्षण की शुरुआत हुई।

सुमन को बचपन से ही चित्रकला और संगीत में गहरी रुचि थी। उन्होंने मुंबई के प्रसिद्ध सेंट कोलंबा हाई स्कूल से शिक्षा प्राप्त की और आगे चलकर प्रतिष्ठित सर जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट्स में चित्रकला की पढ़ाई के लिए प्रवेश लिया। इसी दौरान उन्होंने पुणे के प्रभात फिल्म्स के संगीत निर्देशक और पारिवारिक मित्र पंडित केशवराव भोले से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा लेना शुरू किया। इसके बाद उन्होंने उस्ताद अब्दुल रहमान खान और गुरु मास्टर नवरंग से भी संगीत का प्रशिक्षण प्राप्त किया। उनकी छोटी बहन श्यामा हेम्माडी भी एक गायिका थीं। सुमन कल्याणपुर ने वर्ष 1952 में ऑल इंडिया रेडियो पर पहली बार सार्वजनिक गायन किया। इसके बाद वर्ष 1953 में उन्हें मराठी फिल्म “शुक्राची चांदणी” में गीत गाने का अवसर मिला।हिंदी फिल्मों में उनकी शुरुआत वर्ष 1954 में फिल्म “मंगू” से मानी जाती है, जिसमें उनका गीत “कोई पुकारे धीरे से तुझे” शामिल था। इसी वर्ष उन्होंने फिल्म “दरवाजा” में संगीतकार नौशाद के निर्देशन में कई गीत गाए, जिसे उनकी शुरुआती हिंदी फिल्मों में प्रमुख माना जाता है।उनका पहला युगल गीत महान गायक तलत महमूद के साथ फिल्म “दरवाजा” में रिकॉर्ड किया गया था, जिसने उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में पहचान दिलाई। कहा जाता है कि एक संगीत समारोह में तलत महमूद उनकी गायकी से अत्यंत प्रभावित हुए थे और उन्होंने ही उन्हें फिल्मी दुनिया में अवसर दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उस समय हिंदी फिल्म संगीत पर लता मंगेशकर , आशा भोसले और अन्य दिग्गज गायिकाओं का दबदबा था, लेकिन सुमन कल्याणपुर ने अपनी अलग पहचान बनाई। सुमन कल्याणपुर की आवाज़ की तुलना अक्सर प्रसिद्ध गायिका लता मंगेशकर से की जाती रही है, क्योंकि उनकी गायकी की शैली और स्वर-गुण काफी हद तक लता मंगेशकर की तरह ही मानी जाती थी। उनके कई गीत इतने समान स्वर-शैली में थे कि श्रोता उन्हें लता मंगेशकर के गीत समझ लेते थे। हालांकि स्वयं सुमन कल्याणपुर इस तुलना को लेकर कई बार असहज भी रहीं। उन्होंने एक बार कहा था कि वे लता मंगेशकर से बहुत प्रभावित थीं और कॉलेज के दिनों में उन्हीं के गीत गाया करती थीं। उनके अनुसार उनकी आवाज़ स्वभाव से कोमल और पतली थी, और उस समय रेडियो प्रसारणों में कलाकारों के नाम भी अक्सर घोषित नहीं किए जाते थे, जिससे और अधिक भ्रम पैदा होता था।

सुमन कल्याणपुर ने महान गायिका लता मंगेशकर के साथ युगल गीत “कभी आज, कभी कल, कभी परसों” गाया, जिसका संगीत निर्देशन हेमंत कुमार ने किया था। उन्होंने कई प्रसिद्ध पुरुष गायकों के साथ भी यादगार युगल गीत रिकॉर्ड किए, जिनमें किशोर कुमार , मोहम्मद रफ़ी , मन्ना डे , मुकेश , तलत महमूद और हेमंत कुमार शामिल हैं।उनके मोहम्मद रफी के साथ गाए गए प्रमुख युगल गीतों में “आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे”, “ना ना करते प्यार”, “तुमसे ओ हसीना”, “रहें ना रहें हम”, “परबतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है”, “अजहूं न आए बालमा”, “तुमने पुकारा और हम चले आए”, “बहुत मुदत के ये घड़ी आई”, “मुझे यह भूल ना”, “दिल ने फिर याद किया”, “तुझको दिलबरी की कसम” और “चांद तकता है इधर” शामिल हैं।

मन्ना डे के साथ उन्होंने संगीतकार दत्ताराम के निर्देशन में लोकप्रिय गीत “ना जाने कहाँ हम थे” गाया। वहीं मुकेश के साथ उनके कई लोकप्रिय युगल गीत रहे, जैसे “ये किसने गीत छेड़ा”, “अखियों का नूर है तू”, “मेरा प्यार भी तू है”, “दिल ने फिर याद किया” और “शमा से कोई कह दे”।इसके अलावा सुमन कल्याणपुर ने शास्त्रीय आधार वाले कई यादगार गीत भी गाए, जिनमें “मनमोहन मन में हो तुम्हीं”, “मेरे संग गा गुनगुना” और “गिर गई रे मोरे माथे की बिंदिया” शामिल हैं। वर्ष 1958 में सुमन कल्याणपुर का विवाह मुंबई के व्यवसायी रमणंद कल्याणपुर से हुआ। विवाह के बाद उनका नाम सुमन हेम्माडी से बदलकर सुमन कल्याणपुर हो गया। विवाह के बाद भी उन्होंने अपने संगीत करियर को जारी रखा और परिवार व कला के बीच संतुलन बनाए रखा।उनकी एक पुत्री चारु अग्नी हैं, जो अमेरिका में रहती है।

सुमन कल्याणपुर को उनके योगदान के लिए महाराष्ट्र सरकार का लता मंगेशकर पुरस्कार और कई सम्मान प्राप्त हुए। वर्ष 2023 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया।अपने करियर में 740 से अधिक फिल्मी गीत और हजारों गैर-फिल्मी गीत गाकर सुमन कल्याणपुर ने भारतीय संगीत को समृद्ध किया। उनकी आवाज की मिठास, शास्त्रीय आधार और भावपूर्ण गायकी ने उन्हें भारतीय फिल्म संगीत इतिहास में अमर स्थान दिलाया।आज भी उनके गीत रेडियो, टेलीविजन और डिजिटल मंचों पर समान रूप से लोकप्रिय हैं और उनकी संगीत यात्रा भारतीय संगीत की अमूल्य धरोहर मानी जाती है। सुमन कल्याणपुर का निधन 31 मई 2026 को मुंबई, महाराष्ट्र में 89 वर्ष की आयु में हुआ। वे लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं। उनके निधन की खबर से पूरे संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई। संगीत प्रेमियों, कलाकारों और फिल्म जगत की कई हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को भारतीय फिल्म संगीत के स्वर्णिम इतिहास का अमूल्य हिस्सा बताया। उनकी मधुर आवाज और यादगार गीतों की विरासत उन्हें हमेशा अमर बनाए रखेगी।उनका अंतिम संस्कार आज दिन में किया जायेगा।

 

 

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