आर माधवन का सपना भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना था, लेकिन उम्र सीमा में छह महीने की कमी के कारण वह सेना में नहीं जा सके। इसके बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा।
एक्टर आर माधवन आज अपनी शानदार अभिनय क्षमता, सादगी और दमदार किरदारों के लिए जाने जाते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने कभी अभिनेता बनने का सपना नहीं देखा था। उनका लक्ष्य भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना था। हालांकि, किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था।
सेना में भर्ती की उम्र सीमा से महज छह महीने कम होने की वजह से आर माधवन का सपना अधूरा रह गया, लेकिन यही घटना उन्हें अभिनय की दुनिया तक ले आई। आर माधवन का जन्म 1 जून 1970 को जमशेदपुर में एक तमिल परिवार में हुआ था। उनके पिता रंगनाथन टाटा स्टील में मैनेजमेंट एग्जीक्यूटिव थे, जबकि उनकी मां सरोजा बैंक ऑफ इंडिया में मैनेजर थीं।
आर माधवन की रुचि
पढ़ाई के साथ-साथ माधवन की रुचि खेलों भाषण प्रतियोगिताओं और एनसीसी गतिविधियों में भी थी। युवा अवस्था में उनका सबसे बड़ा सपना भारतीय सेना की वर्दी पहनना था। एनसीसी में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण उन्हें महाराष्ट्र के सर्वश्रेष्ठ कैडेट्स में शामिल किया गया। इसी उपलब्धि ने उन्हें ब्रिटेन में विशेष सैन्य प्रशिक्षण लेने का अवसर भी दिलाया, जहां उन्होंने सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का अनुभव प्राप्त किया।
उम्र की कमी ने तोड़ा सपना
माधवन ने सेना में शामिल होने के लिए पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन जब आवेदन का समय आया तो उनकी उम्र निर्धारित सीमा से छह महीने कम निकली। यह एक ऐसा झटका था जिसने उनके सपनों को तोड़ दिया। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी। सेना में न जा पाने के बाद उन्होंने पर्सनैलिटी डेवलपमेंट और पब्लिक स्पीकिंग की क्लासेस लेना शुरू किया। इसी दौरान मॉडलिंग की दुनिया से उनका परिचय हुआ।
अभिनय ने दिलाई नई पहचान
टेलीविजन में काम करने के बाद साल 2000 में रिलीज हुई तमिल फिल्म ‘अलाई पायूथे’ ने उन्हें बड़ी पहचान दिलाई। इसके बाद हिंदी फिल्म ‘रहना है तेरे दिल में’ से वह देशभर के युवाओं के बीच लोकप्रिय हो गए। आर माधवन ने आगे चलकर ‘रंग दे बसंती’, ‘3 इडियट्स’, ‘तनु वेड्स मनु’, ‘विक्रम वेधा’ और ‘रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट’ जैसी फिल्मों में दमदार अभिनय किया।
