
भोपाल।विधानसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने राज्य सरकार पर नल जल योजना और जल जीवन मिशन में हजारों करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए पूरे मामले में श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।
अजय सिंह ने जारी बयान में आरोप लगाया कि गांवों में नल जल योजना के लिए केंद्र सरकार से प्राप्त लगभग 30 हजार करोड़ रुपए में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है और अब इसे छिपाने के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के पुनर्गठन अथवा विलय की तैयारी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार पीएचई विभाग के कुछ हिस्सों का पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा नगरीय निकाय एवं आवास विभाग में विलय करने की दिशा में काम कर रही है। उनका आरोप है कि यह कदम जल जीवन मिशन में हुए कथित महाघोटाले के सबूत मिटाने और संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदारों को बचाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से बिना कार्य पूर्ण हुए भुगतान किए जाने और कागजों पर कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने की शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने दावा किया कि मुरैना में कथित रूप से फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर घटिया पाइप स्वीकृत किए गए, जबकि मंदसौर में बिना जमीनी कार्य के भुगतान किए जाने के आरोप हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मांग की कि पीएचई विभाग और जल जीवन मिशन के तहत हुए सभी कार्यों की स्वतंत्र एजेंसी अथवा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त अथवा कार्यरत न्यायाधीश की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराई जाए।
अजय सिंह ने सरकार से श्वेत पत्र जारी कर यह जानकारी सार्वजनिक करने की भी मांग की कि अब तक कितना बजट स्वीकृत हुआ, कितना भुगतान किया गया और कितने गांवों तक वास्तव में पेयजल पहुंचा।
