
नयी दिल्ली 10 जनवरी (वार्ता) भारत में विभिन्न उद्योगों में वर्ष 2027 तक 24.3 लाख ब्लू-कॉलर कर्मचारियों की आवश्यकता होगी।
ग्लोबल मैचिंग और हायरिंग प्लेटफॉर्म, इनडीड के नए सर्वे रिपोर्ट में यह दवा किया गया है। अकेले क्विक कॉमर्स सेक्टर में सबसे आगे रहते हुए पाँच लाख नई नौकरियों का सृजन होगा।
सर्वे में शामिल 14 क्षेत्रों में लगभग 47 प्रतिशत नियोक्ता 2025 और उसके बाद ब्लू कॉलर कर्मचारियों की भर्ती करने की योजना बना रहे हैं। इस वृद्धि में क्विक कॉमर्स का योगदान महत्वपूर्ण होगा। सीज़नल नौकरियाँ दीर्घकालिक करियर के अवसर लेकर आ रही हैं। कंपनियाँ सस्टेनेबल एम्प्लॉयमेंट के लिए निवेश कर रही हैं।
ऑटोमेशन और एआई भी इन नौकरियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कुछ टास्क टेक्नोलॉजिकल समाधानों द्वारा स्ट्रीमलाईन किए जाएंगे। हालाँकि इस सेक्टर की वृद्धि में मनुष्यों की भूमिका सबसे अहम होगी। कुशल, टेक-इनेबल्ड कर्मचारियों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जो विकसित होते हुए उद्योग की जरूरतों के अनुरूप ढल सकें।
रिटेल में डिलीवरी ड्राइवरों और रिटेल स्टाफ के साथ महीने का औसत मूल वेतन लगभग 22,600 रुपये होता है। पीक सीज़न में दैनिक, साप्ताहिक और मासिक बोनस के साथ कर्मचारियों की आय बढ़ जाती है। इसके अलावा, कर्मचारियों को नॉन-मोनेटरी पर्क, जैसे उपहार में स्मार्टफोन, रेफरल रिवॉर्ड आदि भी दिए जाते हैं।
सर्वे में सामने आया कि क्विक कॉमर्स उद्योग में पिछली तिमाही (अक्टूबर 2024 – दिसंबर 2024) में त्योहारों की शॉपिंग तथा ई-कॉमर्स की मांग संभालने के लिए लगभग 40,000 कर्मचारियों को नौकरी पर रखा गया। उद्योग में तेजी से बढ़ते ऑपरेशंस संभालने के लिए डिलीवरी ड्राईवर, रिटेल स्टाफ, वेयरहाउस एसोसिएट, और लॉजिस्टिक्स को-ऑर्डिनेटर्स की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई।
चेन्नई, पुणे, बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली जैसे टियर 1 शहरों में क्विक कॉमर्स बढ़ने के साथ काफ़ी ज़्यादा नियुक्ति गतिविधियां देखी जा रही हैं। चंडीगढ़ और अहमदाबाद जैसे टियर 2 शहरों में भी नौकरियां बढ़ीं, जिससे विकसित होते हुए शहरों में क्विक कॉमर्स की बढ़ती पहुंच प्रदर्शित होती है।
