शहर का मास्टर प्लान आखिर कब होगा तैयार ?

पूर्व में 17 साल के बाद बना था मास्टर प्लान

इंदौर: इंदौर के मास्टर प्लान को लेकर कोई तैयारी नजर नहीं आ रही है. पहले भी शहर का मास्टर प्लान 17 साल बाद बना था. मास्टर प्लान 2021 को खत्म हुए तीन साल बीत चुके है. मास्टर प्लान को लेकर शासन की तरफ से अभी तक कोई भी स्पष्टीकरण नहीं दिया जा रहा है.इंदौर के मास्टर प्लान को लेकर शासन स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. सिर्फ दो-तीन बार बैठकें हुई है, और सुझाव मांगे गए, मगर नतीजा कुछ नहीं निकाला है.

शहर का मास्टर प्लान पहले भी 17 साल बाद जारी हुआ था. उसका परिणाम यह हुआ कि ग्रीन बेल्ट में कॉलोनियां बस गई। आवासीय क्षेत्र में इंडस्टि्रयल उपयोग हो गया. नया ग्रीन बेल्ट आवासीय क्षेत्र में बदल गया. सड़कों, ओवरब्रिज और सुव्यवस्थित विकास का ढांचा तैयार ही नहीं हो सका. इसका एक मात्र कारण समय पर मास्टर प्लान घोषित नहीं किया जाना है. ध्यान रहे कि मास्टर प्लान 1991 के बाद सरकार ने 2008 में मास्टर प्लान बनाया था. इतने वर्षों के बीच शहर में कई स्थानों पर अव्यवस्थित विकास और अवैध कॉलोनियों का अंबार लग गया. सड़कों की जगह अतिक्रमण हो गए, बगीचे तो गायब हो गए. स्थिति यह हो गई कि शहर का हरियाली क्षेत्र 18 प्रतिशत की जगह घट कर 5 प्रतिशत तक पहुंच गया.

सामान्य से 3 से 5 डिग्री बढ़ा तापमान
पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि आज शहर का तापमान सामान्य से 3 से 5 डिग्री तक बढ़ चुका है. कहने का तात्पर्य यह है कि यदि मास्टर प्लान समय पर जल्दी घोषित नहीं किया गया तो जमीनों पर बेतरतीब ढंग से विकास होता रहेगा. भले ही 79 गांव की जमीनों पर विकास अनुमति पर रोक लगा रखी हो. अवैध निर्माण और काम तो निरंतर जारी है.

प्रदेश से लेकर स्थानीय अधिकारी भी उदासीन
इंदौर हमेशा से स्वयं का विकास करता रहा है. इस शहर को लेकर कलेक्टर से लेकर कमिश्नर तक सभी अधिकारी दूसरी तरफ ज्यादा ध्यान लगाते है. शहर के विकास योजना लागू करने और बनवाने में अधिकारियों की भी कोई रुचि नहीं दिखती है. प्रदेश के अधिकारी तो हां देखते है…, कहकर अभी तक टालते रहे है. आखिर इंदौर विकास योजना कौन बनाएगा और कब बनेगा? किसी को पता नहीं है.

जनप्रतिनिधि उदासीन क्यों है…?
मास्टर प्लान को लेकर महापौर, 9 विधायक और एक सांसद शहर के जनप्रतिनिधि है. संबंधित विकास योजना के मंत्री भी इंदौर से ही है. इसके बावजूद मास्टर प्लान को लेकर किसी विधायक, सांसद और महापौर द्वारा आवाज नहीं उठाना, मास्टर प्लान तैयार करने की बात नहीं करना? इसको क्या समझा जाएं। क्या इंदौर की जनता को सुव्यवस्थित विकास की जगह अनियोजित विकास के दलदल में धंसने को छोड़ दिया है?

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