
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में महिला गेस्ट फैकल्टी को मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने मेटरनिटी बेनेफिट एक्ट 1961 के प्रावधानों का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता को 26 सप्ताह का सवैतनिक अवकाश देने के निर्देश दिए।
कटनी के शासकीय तिलक पीजी कॉलेज में गेस्ट फैकल्टी के पद पर कार्यरत डॉ. प्रीति साकेत की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, अधिवक्ता हितेंद्र गोल्हानी व काजल विश्वकर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता को पहले 6 महीने का मातृत्व अवकाश वेतन सहित स्वीकृत किया गया था। बाद में 16 जून 2023 को कॉलेज प्रशासन द्वारा आदेश में संशोधन कर यह कहा गया कि अवकाश अवधि में कोई मानदेय नहीं दिया जाएगा। इस संशोधित आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। दलील दी गई कि मातृत्व लाभ अधिनियम- 1961 के तहत प्रत्येक महिला कर्मचारी को मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन पाने का अधिकार है। प्रशासन द्वारा आदेश में संशोधन कर मानदेय रोकना कानून के विपरीत है और महिला कर्मचारी के अधिकारों का उल्लंघन है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता को उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि के कारण प्रताडि़त किया जा रहा है। वहीं राज्य की ओर से कहा गया कि गेस्ट फैकल्टी एक अस्थायी नियुक्ति है और संबंधित शासकीय सर्कुलर के अनुसार उन्हें मानदेय देने का प्रावधान नहीं है, इसलिए पूर्व आदेश में संशोधन किया गया।
