दिल्ली डायरी
प्रवेश कुमार मिश्र
इस वर्ष होने वाले असम विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को जब से उम्मीदवारों के चयन करने वाली छानबीन समिति का प्रमुख बनाया गया है तब से असम के राजनीतिक माहौल में हलचल बढ़ गई है. दस वर्षों की भाजपाई सत्ता को चुनौती देने के लिए जिस तरह से कांग्रेसी रणनीतिकारों ने प्रियंका गांधी को आगे किया है उससे साफ है कि कांग्रेस पार्टी प्रियंका की आक्रामक रणनीति के सहारे सत्ता विरोधी लहर के बीच अपने लिए बेहतर भविष्य देख रही है. संभवतः इसी वजह से दिल्ली में बैठे भाजपाई रणनीतिकार अब असम की लड़ाई को आसान मानने के बजाय चुनौतिपूर्ण मानने लगे हैं. भाजपा अब पश्चिम बंगाल के साथ-साथ असम के लिए भी खास रणनीति बना रही है. पार्टी असम की लड़ाई को सिर्फ मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा के भरोसे नहीं छोड़ना चाहती है बल्कि इसके लिए संघ व संगठन के अनुभवी लोगों को तैयारी के लिए लगाने की रणनीति बनाई जा रही है.
चुनावी लड़ाई से पहले आयोग व कोर्ट में लड़ने की तैयारी में ममता
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले सूबे का राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ गया है. सत्ताधारी टीएमसी के रणनीतिकार इस समय जमीनी लड़ाई के अलावा बहुकोणीय मोर्चे पर लड़ाई लड़ रहे हैं. टीएमसी नेता पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक मोर्चाबंदी करने में लगे हैं.पार्टी नेता जहां एक तरफ चुनाव आयोग के सामने एसआईआर से जुड़े विषयों को उठाकर उसमें मौजूद कथित कमियों को रेखांकित कर आयोग से सीधे नोंक-झोंक कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का रूख करने की तैयारी में है. टीएमसी के नेता दिल्ली में लगातार डेरा जमाए हुए हैं. इतना ही नहीं टीएमसी नेता जहां एक तरफ मीडिया के माध्यम से एसआईआर के दौरान आयोग द्वारा कथित अनियमितता को उजागर करने के प्रयास कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर कानूनी विशेषज्ञों से सलाह करके जल्द ही चुनाव आयोग के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं.
उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर दिल्ली में हलचल
मकरसंक्रांति के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने जा रहे हैं. पिछले दिनों दिल्ली प्रवास के दौरान योगी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेताओं के साथ औपचारिक बैठक कर भविष्य की रणनीति और राजनीति पर विस्तृत चर्चा की है. चर्चा है कि विधानसभा चुनाव के पहले होने वाले संभवतः आखिरी मंत्रिमंडल विस्तार में क्षेत्रीय समीकरणों के साथ-साथ जातीय समीकरण को भी साधने का प्रयास किया जाएगा. चर्चा है कि पार्टी के केन्द्रीय नेताओं ने हाल ही में पार्टी के अंदर ब्राह्मण विधायकों की खास बैठक के पीछे की राजनीतिक मंशा को समझने का प्रयास किया . माना जा रहा है कि चुनाव के ठीक पहले जाति विशेष द्वारा आयोजित संभवतः पहली बैठक को पार्टी काफी गंभीरता से ले रही है. इसलिए कहा जा रहा है कि योगी मंत्रिमंडल के विस्तार में इस दबाव का असर दिखेगा.
थरूर की सफाई के मायने
पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य शशि थरूर के कथित पार्टी विरोधी रूख को लेकर जिस तरह से चर्चा होती रही है उसको लेकर थरूर ने आगे बढ़कर पार्टी लाइन से हटने के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि उन्होंने कभी भी कांग्रेस की आधिकारिक सोच के खिलाफ कोई रुख नहीं अपनाया. थरूर के बदले रूख पर वैसे तो किसी ने भी औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि थरूर ने केरल की राजनीतिक स्थिति को भांपते हुए अपने रूख में बदलाव किया है . हालांकि कुछ लोग उन्हें देर आए दुरूस्त आए की उपमा देते हुए कह रहे हैं कि थरूर के बहुआयामी व्यक्तित्व का सम्मान कांग्रेस के अलावा कहीं और नहीं हो सकता है.
