कंपनी ने शुरू किया घर-घर कनेक्शन, कितना चार्ज करेंगे बाद में होगा मेंशन
वार्ड क्रमांक 1 से काम हुआ प्रारंभ 60, हजार घरों की गंदगी को निकालेंगे बाहर
प्रमोद व्यास
उज्जैन: पिछले 8 साल से खुदाई का दंश झेल रही आम जनता को अब राहत मिलने वाली है. कुछ माह के अंदर टाटा कंपनी शहर के 60 हजार घरों को सीवरेज प्रोजेक्ट से जोड़ने लगी है. इसके लिए वार्ड क्रमांक एक पिपली नाका क्षेत्र से काम प्रारंभ हो गया है.आम जनता पर प्रतिमाह अब एक और खर्च का बोझ बढ़ने वाला है. बिजली के बिल, पानी के बिल, संपत्ति कर, इंटरनेट से लेकर अन्य तरह के बिल आम जनता अभी वहन करती आई है, अब सुविधाओं में इजाफा करने के नाम पर जिस तरह से टाटा प्रोजेक्ट शहर में काम कर रहा है. ऐसे में अब घरों की गंदगी को बाहर निकालने के लिए भी लोगों को बिल चुकाना पड़ेगा.
दो साल का काम 8 साल में भी नहीं
भूमिगत सीवरेज प्रोजेक्ट में पाइप लाइन बिछाने वाली टाटा कंपनी ने वर्ष 2017 में कार्य प्रारंभ किया था. 2019 में यह प्रोजेक्ट पूरा करना था, 2 साल की बजाय 8 साल में भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका, ऐसे में टाटा को बाय-बाय करने से पहले अब जिला प्रशासन और नगर निगम अधूरा कार्य कंपनी से पूरा करवा रही है.
50 घर प्रतिदिन
नवभारत से चर्चा में टाटा कंपनी के कंसल्टेंट विवेक राज त्रिपाठी ने बताया लोगों के घरों में कनेक्शन जोड़ने का काम टाटा सीवरेज प्रोजेक्ट ने प्रारंभ कर दिया गया है. प्रतिदिन 50 घरों को जोड़ने का टारगेट दिया गया है.
60 हजार घरों को जोड़ेंगे
चर्चा में त्रिपाठी ने बताया कि टाटा कंपनी आम जनता को शहर में बेहतर सीवरेज प्रोजेक्ट का लाभ देना चाहती है. यही कारण है कि लगभग 60 हजार से अधिक घरों में कनेक्शन दिए जाएंगे.
पहले चरण में 14 हजार
पिपली नाका जोन क्रमांक 1 से लेकर वार्ड क्रमांक 2 तक और उसके बाद वार्ड 3 में यह काम सिलसिलेवार चलता रहेगा. पहले चरण में 14 हजार घरों को इस प्रोजेक्ट से जोड़ा जाएगा. दावा तो किया गया था कि कंपनी काम पूरा होने के बाद 10 साल तक मेंटेनेंस करेगी इधर जिला प्रशासन और नगर निगम ने कंपनी को हटाने की तैयारी कर ली है.
प्रोजेक्ट का यह मकसद
सिंहस्थ 2028 आ रहा है. शिप्रा शुद्घिकरण और शहर को खुले नाले-नालियों से मुक्त के लिए निगम ने 6 नवंबर 2017 को शहर में भूमिगत सीवरेज पाइप लाइन बिछाने का काम शुरू कराया था. सर्वे, पाइपलाइन डिजाइन की मंजूरी, कोर्ट में लगी जनहित याचिका और आम चुनाव की वजह से प्रोजेक्ट में देरी हुई. तय हुआ था कि कंपनी नवंबर-2019 तक कंपनी शहर में 540 किमी लंबी पाइपलाइन का नेटवर्क बिछाएगी और सुरासा में ट्रीटमेंट प्लांट बनाएगी.
2 हजार एडवांस, 150 रुपए बिल
टाटा का यह पूरा प्रोजेक्ट 700 करोड़ का है, जिसके पहले फेज में 402 करोड़ रुपए से शहर के 54 में से 35 वार्डों में भूमिगत सीवरेज लाइन बिछाई गई है. पाइप लाइन का आकार 200 से 1600 मिमी व्यास तक है. बड़े आकार की पाइपलाइन सीमेंट-कांक्रीट की है, जबकि छोटे आकार की पीवीसी की तरह डबल वॉल कॉरगेटेड है. पाइप लाइन बिछाने के बाद टाटा कंपनी अब शहर के मकानों के बाथरूम के पाइप को सीवरेज लाइन से जोड़ रही है. हर घर से 2 हजार रुपए कनेक्शन चार्ज और 150 रुपए महीना शुल्क वसूले जाने की तैयारी में है. हालांकि कंपनी का कहना है कि प्रतिमाह डेढ़ सौ से अधिक भी राशि हो सकती है यह बाद में पता चलेगा.
60000 टॉयलेट को जोड़ा जा रहाः कंपनी
टाटा कंपनी ने प्रोजेक्ट के तहत लोगों के घरों को सीवरेज लाइन से जोड़ने का काम शुरू कर दिया है. लगभग 60 हजार टॉयलेट को जोड़ा जा रहा है इसके लिए कितना बिल आएगा यह मेजरमेंट के बाद पता चलेगा.
– विवेक राज त्रिपाठी, कंसलटेंट टाटा, कंपनी उज्जैन
