
करोड़ों का साइबर अपराध करने वाले को जमानत नहीं
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने करोड़ों रुपये का साइबर अपराध करने वाले आरोपी को जमानत देने से इंकार कर दिया है। जस्टिस पी के अग्रवाल की एकलपीठ के समक्ष शासन की ओर से दलील दी गई कि भोले-भाले लोगों का अपना शिकार बनाकर सायबर ठगी कर करोड़ों रुपये की राशि वसूल कर उसे पाकिस्तान और श्रीलंका भेजा जाता है। जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर का गंभीर अपराध है। मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
दरअसल यह मामला तमिलनाडु के सीताकड़ी निवासी बाबूलाल उर्फ बबलू की ओर से दायर किया गया था। जिसे भोपाल क्राइम ब्रांच की टीम ने शिवम शर्मा की शिकायत पर 30 अगस्त 2024 को गिरफ्तार किया गया था। मामले में आरोप था कि वैभव ने तीन लाख रुपए का लोन दिलाने के नाम पर उससे ब्लैंक चेक, एटीएम कार्ड लिया। इसके बाद खाते में भारी भरकम ट्रांजेक्शन होने की जानकारी मिलने पर शिवम ने क्राइम ब्रांच को 10 जुलाई 2024 को शिकायत दी। जांच में पता चला कि वैभव अपने एक साथी के साथ मिलकर भोपाल, सीहोर और आष्टा में रहने वाले भोले भाले लोगों के बैंक अकाउंट किराए पर लेता है। ऑनलाईन ठगी से मिलने वाली रकम किराए पर लिए गए बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की जाती थी। उसके बाद वैभव और उसका एक दोस्त रकम निकालकर आवेदक बाबूलाल को भेजते थे। बाबूलाल उस रकम को क्रिप्टो करंसी में बदलकर पाकिस्तान के गनी बाबा को भेजा था। इसका उन सभी को कमीशन मिलता था। जांच के बाद क्राइम ब्रांच ने करोड़ों रुपए की साइबर ठगी से जुड़े इस मामले में बाबूलाल को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया। वहां पर उसके और उसकी पत्नी के मोबाईल से पाकिस्तान के गनी बाबा और श्रीलंका के लोगों से बातचीत के सबूत भी मिले। बाबूलाल और उसकी पत्नी के मोबाइल से वैभव और उसके दोस्त के द्वारा जुटाए गए कई बैंक अकाउंट की जानकारी भी गनी बाबा को व्हाट्सएप से भेजी गई थी। क्राईम ब्रांच द्वारा भादंवि की धारा 420 व 409 के तहत दर्ज मामले में जमानत का लाभ पाने यह अर्जी दाखिल की गई थी।
