
जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने अनुदान प्राप्त अशासकीय शिक्षण संस्थाओं के शिक्षकों को वर्ष 2016 से लंबित सातवें वेतनमान के भुगतान के मामले में राज्य शासन को एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है। जस्टिस दीपक खोत की एकलपीठ ने अवमानना प्रकरण में आदेश का पालन करने के लिए शासन को एक और अंतिम अवसर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस बार भी आदेश का पालन नहीं हुआ तो मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा एवं आयुक्त लोक शिक्षण सहित संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होना पड़ेगा। याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी राजेन्द्र कुमार तिवारी विरुद्ध संजय गोयल की ओर से पक्ष रखा गया।
सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों की ओर से आदेश के पालन संबंधी कंप्लायंस रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया। इस पर कोर्ट ने ध्यान दिलाया कि 15 अक्टूबर 2026 को ही अंतिम अवसर देते हुए दो सप्ताह का समय प्रदान किया गया था। इसके बावजूद अब तक आदेश का पालन नहीं किया गया और न ही अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत हुई। कोर्ट ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए न्यायहित में एक और अंतिम अवसर प्रदान किया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय में आदेश का पालन नहीं होने की स्थिति में मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा, आयुक्त लोक शिक्षण सहित संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देना होगा। मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को निर्धारित की गई है।
