पुतिन ने गैस पाइपलाइन प्रस्ताव पर चर्चा के लिए ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रजाई की मेजबानी की

मास्को, 06 नवंबर (वार्ता) रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने राष्ट्रपति भावन में ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रजाई की मेजबानी की।

इस दौरान दोनों देशों के बीच एक नई गैस पाइपलाइन की योजनाओं पर भी चर्चा हुई, जिससे ईरान को घरेलू ईंधन की कमी से निपटने में मदद मिल सकती है और मास्को को पड़ोसी देशों में गैस निर्यात का विस्तार करने का अवसर मिल सकता है।

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव रजाई ने ईरानी दूतावास के रिपोर्ट किए गए बयानों के अनुसार, गुरुवार की बैठक को ‘बेहद महत्वपूर्ण चर्चा’ बताया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित पाइपलाइन से ईरान को “अपनी गैस की कमी को दूर करने के साथ-साथ पड़ोसी देशों को रूसी गैस की बिक्री में सुविधा होगी।”

श्री रजाई ने कहा कि पुतिन ने क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्थाओं के महत्व और पश्चिम एशिया की स्थिति को हल करने में ‘बाहरी ताकतों के किसी भी हस्तक्षेप की अस्वीकार्यता’ पर जोर दिया। यह बैठक दो नवंबर को दोनों नेताओं के बीच हुई टेलीफोन पर बातचीत के बाद हुई है, जिसके दौरान उन्होंने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों, विशेष रूप से पश्चिम एशिया के संघर्ष पर चर्चा की थी।

श्री रजाई ने कहा कि रूस की बैठकों में युद्ध के बाद की सुरक्षा व्यवस्थाओं और अमेरिका की उस ‘आक्रामकता’ को समाप्त करने के लिए रूस के समर्थन पर भी चर्चा हुई, जिसे उन्होंने ईरान के खिलाफ बताया था। उन्होंने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई चाहते थे कि वे जल्द से जल्द श्री पुतिन तक एक संदेश पहुंचाएं। मास्को की इस यात्रा की योजना लगभग एक महीने पहले बनाई गई थी, लेकिन क्षेत्र में सैन्य स्थिति को लेकर रोजाना चल रही चर्चाओं के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। श्री रजाई ने संदेश की सामग्री का खुलासा नहीं किया।

श्री खामेनेई ने बुधवार को एक लिखित बयान में कहा कि ईरान को अमेरिका के सामने ‘झुकने का थोड़ा-सा भी रुझान’ नहीं दिखाना चाहिए और देश से मजबूत बनने तथा ‘पूर्ण प्रतिरोध’ की स्थिति हासिल करने का आह्वान किया। श्री रजाई ने कहा कि पुतिन ने संघर्ष को समाप्त करने में मदद करने के लिए रूस की तत्परता को दोहराया है। रूसी समाचार एजेंसियों के अनुसार, पिछले महीने रूसी राष्ट्रपति ने अपने ईरानी समकक्ष मसूद पेजेश्कियन से कहा था कि रूस उस लक्ष्य की दिशा में प्रयासों का समर्थन करने के लिए ‘सब कुछ करने’ को तैयार है।

ईरान ने हालांकि अपनी मांगें पूरी होने तक अमेरिका से बातचीत करने से इनकार कर दिया है। श्री रजाई ने कहा कि ईरान ने अमेरिका के सामने सात शर्तें रखी हैं और जब तक वे पूरी नहीं हो जातीं, तब तक वह न तो होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलेगा और न ही युद्ध के अंत के लिए बातचीत करेगा। इन शर्तों में युद्ध के नुकसान की भरपाई, जब्त की गई ईरानी संपत्तियों को मुक्त करना, प्रतिबंधों को हटाना, अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को समाप्त करना, क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी, ईरान और उसके सहयोगियों से जुड़े संघर्ष का स्थायी अंत तथा ईरान को दोबारा न धमकाने की प्रतिबद्धता शामिल है।

यह प्रस्तावित ऊर्जा सहयोग ऐसे समय में आया है, जब एक प्रमुख उत्पादक होने के बावजूद ईरान को लगातार प्राकृतिक गैस की कमी का सामना करना पड़ रहा है। देश की हीटिंग प्रणालियों के लिए गैस आवश्यक है, जबकि भारी सब्सिडी वाले ईंधन ने पारंपरिक रूप से घरेलू कीमतों को दुनिया में सबसे कम स्तर पर बनाए रखा है। सरकार ने सितंबर में ईंधन की कीमतें बढ़ाने की योजना की घोषणा की थी, लेकिन 2019 जैसी सार्वजनिक रैलियों या विरोध प्रदर्शनों के भड़कने की चिंताओं के बीच इस कदम को स्थगित कर दिया था।

श्री रजाई ने श्री पुतिन को अक्टूबर के अंत में तेहरान में ईरान, सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच हुई बैठक के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रूसी राष्ट्रपति ने इन चर्चाओं का स्वागत किया है। उन्होंने कहा, “अपने चीनी मित्रों की तरह, हमारा मानना है कि क्षेत्रीय व्यवस्थाएं होनी चाहिए और विदेशी देशों को क्षेत्र की सुरक्षा में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।”

रूस की सरकारी समाचार एजेंसी तास के अनुसार, सीनेट पैलेस में हुई इस बैठक का रूस ने तुरंत अपना कोई विवरण जारी नहीं किया। इसके अलावा, ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शांति को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्रीय घटनाक्रम और कूटनीतिक प्रयासों पर चर्चा करने के के लिए कुवैत, सऊदी अरब, ओमान, कतर, तुर्किये और जॉर्डन के अपने समकक्षों के साथ टेलीफोन पर बातचीत की।

मास्को के 2022 में यूक्रेन पर हमला करने के बाद से ही रूस-ईरान ने अपने कूटनीतिक, आर्थिक और सैन्य संबंधों को गहरा किया है। पश्चिमी देशों ने दोनों पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। दोनों देशों ने जनवरी 2025 में व्यापार, रक्षा, विज्ञान, संस्कृति और शिक्षा से जुड़े एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता उसी वर्ष अक्टूबर में लागू हुआ, हालांकि इसमें आपसी रक्षा की कोई शर्त शामिल नहीं है।

ईरानी सैन्य प्रवक्ता मोहम्मद अकरमिनिया ने शनिवार को कहा कि ईरान ने रूसी सुखोई एसयू-35 लड़ाकू विमान खरीदे हैं और युद्ध के बाद उन्हें प्राप्त करने की उम्मीद है। उन्होंने ईरानी समाचार आउटलेट ‘तब्नाक’ को बताया कि विमान मूल रूप से संघर्ष से पहले आने वाले थे, जिसके लिए तैयारियां और पायलट प्रशिक्षण पहले ही पूरा हो चुका है।

 

 

 

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