ईरान के परमाणु स्थलों पर इजरायली हमलों से परमाणु सुरक्षा में भारी गिरावट: आईएईए महानिदेशक

नयी दिल्ली, 21 जून (वार्ता) ईरान में परमाणु स्थलों पर इजरायली हमलों से परमाणु सुरक्षा में भारी गिरावट आई है, हालांकि अभी तक कोई रेडियोधर्मी उत्सर्जन नहीं हुआ है, लेकिन ऐसा होने का खतरा है। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने शनिवार को यह चेतावनी दी।

श्री ग्रॉसी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बताया कि परमाणु सुविधाएं एवं सामग्री युद्ध की चपेट में नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आईएईए इजरायल द्वारा हमले शुरू करने के बाद से ईरान के परमाणु स्थलों की स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है।

बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह ईरान का वह परमाणु स्थल है जहां हमले के परिणाम सबसे गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि इजरायली सैन्य अधिकारी ने मीडिया में गलत बयान दिया कि बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हमला किया गया। हालांकि गलती की शीघ्र पहचान करते हुए बयान वापस ले लिया गया, लेकिन स्थिति ने स्पष्ट एवं सटीक संचार की महत्वपूर्ण आवश्यकता को रेखांकित किया और तकनीकी रूप से सटीक एवं राजनीतिक रूप से निष्पक्ष एजेंसी की अद्वितीय भूमिका रही है।

इजरायल ने शुक्रवार को कहा था कि उसने खाड़ी तट पर ईरान के एकमात्र चालू परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हमला किया है, जो संभवतः ईरान के खिलाफ हवाई युद्ध में बड़ी वृद्धि है। इसी प्रकार, अगर संयंत्र को विद्युत आपूर्ति करने वाली केवल दो लाइनें क्षतिग्रस्त हो जाएं, तो इससे रिएक्टर का कोर पिघल सकता है, जिसके परिणामस्वरूप पर्यावरण में रेडियोधर्मिता उच्च स्तर तक फैल सकता है।

उल्लेखनीय है कि 13 जून को हुए प्रारंभिक हमलों में नतांज संवर्धन स्थल पर विद्युत अवसंरचना को निशाना बनाया गया और उसे नष्ट कर दिया गया।

ग्रॉसी ने कहा कि नतांज स्थल के बाहर रेडियोधर्मिता का स्तर अपरिवर्तित और सामान्य स्तर पर बना हुआ है, जो यह दर्शाता है कि आबादी या पर्यावरण पर कोई बाहरी रेडियोधर्मिता का प्रभाव नहीं पड़ा है। हालांकि, नतांज़ सुविधा में रेडियोलॉजिकल और रासायनिक दोनों तरह के प्रदूषण हैं। यह संभव है कि यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, यूरेनिल फ्लोराइड और हाइड्रोजन फ्लोराइड में मौजूद यूरेनियम आइसोटोप सुविधा के अंदर फैले हुए हों।

आईएईए महानिदेशक ने कहा कि अराक में निर्माणाधीन खोंडाब भारी पानी अनुसंधान रिएक्टर पर 19 जून को हमला हुआ था। चूंकि रिएक्टर चालू नहीं था और उसमें कोई परमाणु सामग्री नहीं थी, इसलिए किसी रेडियोलॉजिकल परिणाम की उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा कि तेहरान परमाणु अनुसंधान रिएक्टर के खिलाफ़ किसी भी कार्रवाई के गंभीर परिणाम हो सकते हैं, संभवतः तेहरान शहर के बड़े क्षेत्रों और उसके निवासियों के लिए। ऐसे मामले में, सुरक्षात्मक कार्रवाई करने की आवश्यकता होगी।

श्री ग्रॉसी ने कहा कि आईएईए ईरान में मौजूद रहेगा और सुरक्षा की स्थिति अनुकूल होते ही वहां निरीक्षण पुनः शुरू करेगा, जैसा कि एनपीटी सुरक्षा समझौते के तहत ईरान के सुरक्षा दायित्वों के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आईएईए ने लगातार इस बात पर बल दिया है कि परमाणु प्रतिष्ठानों पर सशस्त्र हमले कभी नहीं होने चाहिए क्योंकि इससे रेडियोधर्मी उत्सर्जन हो सकता है जिसके गंभीर परिणाम उस देश की सीमाओं के अंदर और बाहर हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि तीन वर्षों में दूसरी बार विश्व दो संयुक्त राष्ट्र और आईएईए सदस्य देशों के बीच संघर्ष देख रहा है, जिसमें परमाणु प्रतिष्ठान खतरे में पड़ रहे हैं और परमाणु सुरक्षा से समझौता हो रहा है। आईएईए को कार्य करने के लिए रचनात्मक, पेशेवर संवाद की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आईएईए को प्रभावित परमाणु सुविधाओं और उनके संबंधित स्थलों के बारे में समय पर और नियमित तकनीकी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। उन्होंने ईरानी नियामक अधिकारियों से आईएईए घटना एवं आपातकालीन केंद्र के साथ रचनात्मक वार्ता जारी रखने का आग्रह किया, जो इस संघर्ष की शुरुआत से ही चौबीसों घंटे काम कर रहा है।

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