सिंगरौली PWD घोटाला: फर्जी बिलिंग मामले में ठेकेदार व अफसरों पर FIR दर्ज

भोपाल। सिंगरौली में पुल निर्माण के नाम पर भ्रष्टाचार का ऐसा खेल हुआ, जिसमें 7 लाख 37 हजार रुपए के अंतिम बिल को कूटरचना कर 40 लाख 91 हजार रुपए का बना दिया गया. करीब 33 लाख 53 हजार रुपए की इस हेराफेरी के लिए न सिर्फ सरकारी दस्तावेजों में काट-छांट की गई, बल्कि ठेकेदार को पेनाल्टी से बचाने के लिए मूल माप पुस्तिकाएं तक गायब कर दी गईं. आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन एसडीओ सुशील कुमार मिश्रा, उपयंत्री चंद्रशेखर तिवारी और विजय कुमार मिश्रा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, रीवा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. मामला चाचर से कुल्हनिया मार्ग पर म्यार नदी में पुल और पहुंच मार्ग निर्माण का है. इस काम का ठेका विजय कुमार मिश्रा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, रीवा को मिला था. लोक निर्माण विभाग के साथ 5 फरवरी 2016 को अनुबंध हुआ था. इसके तहत 18 महीने में यानी 4 अप्रैल 2018 तक निर्माण कार्य पूरा किया जाना था. हालांकि ठेकेदार तय समयसीमा में काम पूरा नहीं कर सका और करीब चार महीने की देरी से 1 अगस्त 2018 को काम पूरा दिखाया गया. देरी के चलते ठेकेदार पर 16 लाख 78 हजार रुपए की पेनाल्टी लगाई गई थी.

पेनाल्टी से बचाने के लिए रची साजिश

ठेकेदार को पेनाल्टी से बचाने के लिए तत्कालीन एसडीओ सुशील मिश्रा ने साजिश रची. जनवरी 2019 में भुगतान के लिए पेश किए गए 7 लाख 37 हजार 861 रुपए के अंतिम बिल में हेराफेरी की गई. पेनाल्टी की गणना के लिए जरूरी मूल माप पुस्तिकाएं ठेकेदार और तत्कालीन उपयंत्री चंद्रशेखर तिवारी की मदद से गायब कर दी गईं. इससे देरी और पेनाल्टी से जुड़े वास्तविक रिकॉर्ड को छिपाने की कोशिश की गई. जांच में सामने आया कि आरोपियों ने माप पुस्तिकाओं में ओवरराइटिंग कर बिल में रकम बढ़ा दी.

 

Next Post

सुकून की रसोई ने अब तक परोसी एक लाख थाली

Wed Nov 4 , 2026
सीहोर। जिला चिकित्सालय में मरीजों के परिजनों को पिछले दो वर्षों से नि:शुल्क भोजन उपलब्ध कराने की इस पहल के तहत अब तक एक लाख थालियां परोसी जा चुकी हैं. यह सेवा पूरी तरह जीरो वेस्ट भंडारे की अवधारणा पर आधारित है, जिसमें सिंगल यूज डिस्पोजल का उपयोग किए बिना […]

You May Like