यूनेस्को : पत्रकारों के हत्यारों को सजा न मिलने की वैश्विक दर 86 प्रतिशत तक पहुंची

पेरिस, 03 नवंबर (वार्ता) संयुक्त राष्ट्र के संगठन यूनेस्को की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में पत्रकारों की हत्या करने वाले दोषियों को सजा दिलाने के मामले में हालात पहले से कहीं अधिक मुश्किल हो गए हैं। इसके अलावा ड्रोन हमले का शिकार होने वाले पत्रकारों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है।

‘इंटरनेशनल डे टू एंड इम्युनिटी फॉर क्राइम अगेंस्ट जर्नलिस्ट्स’ (2 नवंबर) के मौके पर जारी यूनेस्को के महानिदेशक की रिपोर्ट ‘सेफ्टी ऑफ जर्नलिस्ट्स एंड द डेंजर ऑफ इम्युनिटी’ में खुलासा किया गया है कि वर्ष 2024-2025 के दौरान पत्रकारों के खिलाफ अपराध करने वालों को दंड नहीं मिलने की वैश्विक दर बढ़कर 86 प्रतिशत हो गई। यह दर पिछले दो वर्षों में 85 प्रतिशत थी। यूनेस्को ने कहा है कि यह वैश्विक विफलता स्थिति 2012 के बाद पहली बार और अधिक गंभीर होने के रूप में देखी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में पत्रकारों की मौतों में भी भारी इजाफा हुआ है। वर्ष 2024 और 2025 के दौरान कुल 189 पत्रकारों की हत्या हुई। यह पिछले दो वर्षों की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक है। इनमें से दो-तिहाई से अधिक (127 पत्रकारों) की मौत संघर्ष क्षेत्रों में हुई, जहां पत्रकार सैन्य अभियानों, हवाई हमलों और आधुनिक युद्ध तकनीकों के बीच काम कर रहे थे।

यूनेस्को के मुताबिक सबसे चिंताजनक पहलुओं में से एक संघर्ष वाले क्षेत्रों में ड्रोन विमानों का बढ़ता उपयोग है। वर्ष 2024-2025 के दौरान ड्रोन हमलों में 50 पत्रकारों की मौत हुई। यह संख्या युद्ध क्षेत्रों में मारे गए कुल पत्रकारों का लगभग 40 प्रतिशत है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 15 पत्रकारों की मौत तब हुई जब वे ‘प्रेस’ लिखी जैकेट को पहने हुए थे या नाम लिखी गाड़ियों में सफर कर रहे थे। इसके अलावा सात ऐसी घटनाएं दर्ज की गईं जिनमें एक ही हमले में कई पत्रकारों की जान चली गई। यूनेस्को महानिदेशक खालिद अल-अनानी ने पत्रकारों की सुरक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2222 को कड़ाई से लागू करने का आह्वान किया। यह प्रस्ताव सशस्त्र संघर्षों के दौरान पत्रकारों को नागरिकों का दर्जा देता है।

वैश्विक स्तर पर बिगड़ती स्थिति के विपरीत, उन देशों में उत्साहजनक रुझान देखा गया है जो सशस्त्र संघर्ष से प्रभावित नहीं हैं। गैर-संघर्ष वाले देशों में पत्रकार हत्या के अनसुलझे मामलों की दर 2012 की 94 से घटकर 2026 में 77 प्रतिशत पर आ गई है।

इन क्षेत्रों में इस अवधि के दौरान 85 पत्रकारों की हत्या दर्ज की गई, जो पिछले 18 वर्षों में सबसे कम संख्या है। यूनेस्को के अनुसार, यह सुधार दर्शाता है कि जब राष्ट्रीय अधिकारी संसाधनों का सही उपयोग करते हैं, तो मजबूत आपराधिक जांच और प्रभावी अभियोजन से हिंसा और दंडमुक्ति दोनों को कम किया जा सकता है।

इसमें कहा गया है कि संघर्ष रिपोर्टिंग से जुड़ी हिंसा में महिला पत्रकार भी अत्यधिक प्रभावित हो रही हैं। साल 2024-2025 में 14 महिला पत्रकारों की जान गई, जिनमें से 93 प्रतिशत की मौत युद्ध क्षेत्रों में रिपोर्टिंग के दौरान हुई।

यूएन विमेन और इंटरनेशनल सेंटर फॉर जर्नलिस्ट्स के 2025 के अध्ययन का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्वेक्षण में शामिल 75 प्रतिशत महिला पत्रकारों ने ऑनलाइन या ऑफलाइन उत्पीड़न का सामना किया। ऑनलाइन उत्पीड़न के बाद शारीरिक हिंसा का शिकार होने वाली महिला पत्रकारों का प्रतिशत भी 2020 के 20 से बढ़कर 2025 में 40 प्रतिशत अधिक हो गया है।

यूनेस्को ने जोर देकर कहा कि प्रेस की आजादी बनाए रखने युद्ध अभियानों, ऑनलाइन उत्पीड़न और लक्षित हिंसा से पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।

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