114 पदक आपके परिश्रम की पराकाष्ठा का परिणाम है: पीएम मोदी

नयी दिल्ली, 05 नवम्बर (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पैरा एशियाई खेलों में भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की सराहना करते हुए आज कहा कि 114 पदक आपके परिश्रम की पराकाष्ठा का परिणाम है।
पीएम मोदी ने कहा, ”2010 के पैरा एशियाई खेलों में भारत ने बस 1 गोल्ड जीता था। कुल मिलाकर उस टूर्नामेंट में हम केवल 14 मैडल जीत पाये थे। वहीं, इस बार हमारे खिलाड़ी 114 मैडल के साथ आए हैं।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को यहां जापान में हाल ही में संपन्न हुए एशियाई पैरा खेलों के भारतीय पदक विजेताओं से मुलाकात की । श्री मोदी ने इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में इन खेलों में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों के दल से बातचीत की और कहा, ”2010 के 14 पदकों से अब तक के 114 मैडल की ये यात्रा आपके परिश्रम की पराकाष्ठा का परिणाम है।”

पिछले महीने जापान के आइची-नागोया में आयोजित पैरा एशियाई खेलों में भारत ने अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। कुल 97 भारतीय पैरा-एथलीटों ने 114 पदक जीते, जिनमें 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य पदक शामिल हैं। गुरुवार के इस कार्यक्रम में खेल मंत्री मनसुख मांडविया, खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे, कोच, पैरालंपिक कमिटी ऑफ इंडिया और भारतीय ओलंपिक संघ के अधिकारी, राष्ट्रीय खेल महासंघों के प्रतिनिधि तथा युवा मामले और खेल मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल हुए।

श्री मोदी ने कहा, ”आप सभी से मिलने का मुझे बेसब्री से इंतजार था। कुछ ही सप्ताह पहले मैं एशियन गेम्स में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों से मिला था, अब मैं पैरा एशियन गेम्स के शामिल आप सभी ऊर्जावान साथियों से मुझे मिलने का अवसर मिला है। आपका शानदार प्रदर्शन ये बताता है कि आज भारत स्पोर्ट्स की दुनिया में तेजी से एक बड़ी पावर के रूप में उभर रहा है। इतने बड़े प्लेटफार्म पर आप सबने मेडल तो जीता ही है, आपने करोड़ों देशवासियों का दिल भी जीता है। आप सभी पैरा एथलीट्स ने एक बार फिर ये दिखा दिया है कि सबसे ऊंची उड़ान हौसलों से होती है। मैं आप सभी खिलाड़ियों को 140 करोड़ देशवासियों की तरफ से बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

प्रधानमंत्री ने कहा, ”आपकी इस उपलब्धि में आपकी फैमिली, ट्रेनर और कोच की भी अहम भूमिका है, मैं उनका भी अभिनंदन करता हूं। और मैंने पहले भी कहा था, एक सामान्य खिलाड़ी को, उसके पीछे एक कोच को जितनी मेहनत करनी पड़ती है, पैरालंपिक के लिए उससे अनेक गुना ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, तब जाकर के रंग बिखरते हैं। इसलिए, उनको तो मैं विशेष बधाई देता हूं, उनका अभिनंदन करता हूं। उन्होंने कहा,”एक समय था, जब ज़्यादातर खेलों में भारत की भागीदारी केवल औपचारिकता समझी जाती थी। पैरा-गेम्स में तो देश बहुत पीछे था। 2010 के पैरा एशियन गेम्स में भारत ने बस एक गोल्ड मेडल जीता था। कुल मिलाकर उस टूर्नामेंट में हम केवल 14 मेडल्स जीत पाये थे, चौदह।

वहीं, इस बार हमारे खिलाड़ी 114 मेडल्स के साथ आए हैं। कोई सोचे 14 से 114 की ये यात्रा, ये आपके परिश्रम की पराकाष्ठा है, उसी का परिणाम है। खेल के प्रति आपका जो डेडीकेशन है, और एक जो पूरा इकोसिस्टम डेवलप हुआ है, उससे ये परिणाम प्राप्त हो रहा है। इस बार, 30 गोल्ड, 35 सिल्वर, 49 ब्रॉन्ज, 5 नए विश्व रिकॉर्ड्स, 9 एशियाई रिकॉर्ड्स, आपने पूरे देश को गर्व से भर दिया है। इस बार 56 महिला खिलाड़ियों में से चौंतीस बेटियां मेडल विनर बनी हैं। और चार स्पर्धाओं में तो पोडियम पर तीनों जगह हमारा ही झंडा था, हमारे ही खिलाड़ी थे। गोल्ड भी भारत ने जीता, उसी खेल में सिल्वर और ब्रॉन्ज भी भारत ने जीता, और प्रतियोगिता के आखिरी दिन भी, आपने उस दिन तो कमाल कर दिया था, नौ गोल्ड मेडल जीत लिए। ऐसा लग रहा था, जैसे आपने तय कर लिया हो कि जब तक गेम चल रहा है, मेडल जीतने का सिलसिला रुकना नहीं चाहिए।

पीएम मोदी ने कहा, ”इस बार हमारे खिलाड़ियों ने ऐसी स्पर्धाओं में भी गोल्ड हासिल किया है, जिनमें भारत को पहले ये कामयाबी मिली ही नहीं थी, कभी। मोना अग्रवाल ने पैरा शूटिंग में विश्व रिकॉर्ड बनाया। हनी भी अपना ही पुराना वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ करके आए। हिमांशु, रवि और जेहान ने अपनी परफॉर्मेंस से दुनिया को दिखाया कि शारीरिक चुनौतियों को कैसे परास्त करना है।” उन्होंने कहा, ”एक खिलाड़ी की व्यक्तिगत उपलब्धि हो या देश की सामूहिक सफलता हो, जीत की चमक पूरी दुनिया देखती है। लेकिन, उस क्षण के लिए जो वर्षों की मेहनत लगती है, दिन-रात जो पसीना लगता है, जिस अटूट लगन और निष्ठा के साथ तपस्या करनी पड़ती है, जीत की बुलंद इमारत उसी नींव पर खड़ी होती है। जैसे, रिंकू जी ने एशियन पैरा गेम्स से दो महीने पहले अपनी माताजी को खो दिया था। इतने बड़े दुख के बीच भी उन्होंने हिम्मत बनाए रखी, और जब आपने गोल्ड मेडल जीता, तो अपनी मां की तस्वीर उठाकर वो मेडल समर्पित किया। वो पल सभी देशवासियों को भावुक कर गया।”

श्रो मोदी ने कहा, ”साल 2014 के बाद, जब देश ने बड़े लक्ष्यों के लिए अपना ये सफर शुरू किया था, तब हालात एकदम अलग थे। ज़्यादातर पैरेंट्स बच्चों को स्पोर्ट्स में भेजने से डराते थे, खुद भी डरते थे। व्यवस्था की बदहाली, संसाधनों की कमी, सपोर्ट का अभाव, पारदर्शिता की कमी, लोग कहते थे कि इस सिस्टम का कुछ नहीं हो सकता, ऐसे ही चलेगा, ऐसे ही मान लिया था। लेकिन, जैसे आपने किसी भी मुश्किल के सामने हार नहीं मानी, वैसे ही देश ने भी केवल अपने लक्ष्य की ओर देखा। हमने तय किया, हम अपने युवाओं की प्रतिभा को बर्बाद नहीं होने देंगे। और इसलिए, जो सिस्टम आप जैसे युवाओं को आगे बढ़ने से रोकता था, हमने उस सिस्टम को ही बदलने का संकल्प ले लिया। इसी का नतीजा है, खेलों को लेकर एक नई अप्रोच पैदा हुई है। आज अगर एक युवा को अपने टैलेंट पर भरोसा है, तो उसे ये विश्वास भी रहता है कि देश उसके साथ खड़ा रहेगा। हमारे पैरा-स्पोर्ट्स खुद इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। जिन खेलों में पहले भारत का रिप्रजेंटेशन बेहद सीमित होता था, अब उनमें हमारा दबदबा बढ़ रहा है। तीरंदाजी, एथलेटिक्स, शूटिंग, तैराकी, टेबल टेनिस, बैडमिंटन, जूडो, पावरलिफ्टिंग, ऐसे कितने ही खेलों में नए-नए युवा खिलाड़ी सामने आ रहे हैं। हमें नए-नए चैम्पियंस मिल रहे हैं। इस बार भी हमारे 61 खिलाड़ी एशियाई पैरा खेलों में पहली बार खेले हैं, 61 बिल्कुल फ्रेश। और उनमें से जो पहली बार गए, 36 युवा पदक जीत करके लौटे हैं, और संदीप ने तो डेब्यू में ही वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया है। युवाओं की ये भागीदारी, आज के भारत की तस्वीर भी है, और भविष्य के भारत का उद्घोष भी है।”

.....

Next Post

बिजली की मेन लाइन में फंसी स्लीपर बस, पुलिस ने यात्रियों को सुरक्षित उतारा

Thu Nov 5 , 2026
इंदौर. मोती तबेला क्षेत्र में बिजली की मेन लाइन की केबल में स्लीपर बस फंसने से बड़ा हादसा टल गया. घटना बुधवार की रात करीब 11:30 बजे की है. इंदौर से नीमच जा रही बस एमपी 70 जेडसी 5512 में ऊपर से गुजर रही बिजली की केबल फंस गई थी. […]

You May Like