कैबिनेट मंत्री के क्षेत्र में ही स्वास्थ्य सुविधा बदहाल! 

हरीश राठौड

पेटलावद. कैबिनेट मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया के विधानसभा क्षेत्र पेटलावद में स्वास्थ्य सुविधाओं की जमीनी हकीकत कई सवाल खड़े कर रही है। एक ओर सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर पेटलावद के सिविल अस्पताल में लाखों रुपये की डायलिसिस मशीन आने के करीब चार माह बाद भी मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्र के 35 से अधिक मरीजों को डायलिसिस के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब मंत्री के अपने विधानसभा क्षेत्र में ही जरूरी स्वास्थ्य सुविधा शुरू होने में महीनों लग रहे हैं, तो आम मरीजों की परेशानी दूर करने के लिए जिम्मेदार कितने गंभीर हैं?

 *मशीन अस्पताल में, सुविधा का पता नहीं!* 

जानकारी के अनुसार, पेटलावद सिविल अस्पताल में डायलिसिस मशीन आए लगभग तीन से चार माह हो चुके हैं, लेकिन आवश्यक उपकरणों, पार्ट्स और अन्य व्यवस्थाओं के अभाव में अब तक सेवा शुरू नहीं हो सकी है। जिस मशीन से किडनी रोगियों को स्थानीय स्तर पर उपचार मिलने की उम्मीद थी, वह अभी तक मरीजों के लिए उपयोगी साबित नहीं हो पाई है।

सवाल यह है कि मशीन अस्पताल में लाने से पहले आवश्यक व्यवस्थाओं का आकलन क्यों नहीं किया गया? यदि उपकरणों और तकनीकी व्यवस्थाओं की जरूरत थी, तो उनकी प्रक्रिया पहले ही पूरी क्यों नहीं की गई? क्या सरकारी व्यवस्था में मरीजों की जरूरत से ज्यादा फाइलों और प्रक्रियाओं का इंतजार महत्वपूर्ण हो गया है?

 *35 से अधिक मरीजों की परेशानी, जिम्मेदारों की जवाबदेही कौन तय करेगा?* 

सूत्रों के अनुसार, पेटलावद क्षेत्र में 35 से अधिक मरीज ऐसे हैं, जिन्हें नियमित रूप से डायलिसिस की आवश्यकता होती है। स्थानीय स्तर पर सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को झाबुआ, रतलाम और इंदौर जैसे शहरों तक जाना पड़ रहा है।

डायलिसिस कोई सामान्य उपचार नहीं है, जिसे मरीज अपनी सुविधानुसार कभी भी करवा सके। इसके लिए नियमित अंतराल पर अस्पताल पहुंचना जरूरी होता है। ऐसे में लंबी दूरी की यात्रा, आने-जाने का खर्च, परिजनों की भागदौड़ और समय की परेशानी मरीजों के लिए अतिरिक्त बोझ बन जाती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि इन मरीजों की परेशानी की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? स्वास्थ्य विभाग की, स्थानीय प्रशासन की या फिर उन जनप्रतिनिधियों की, जिनसे क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की अपेक्षा की जाती है?

 *कैबिनेट मंत्री का क्षेत्र, फिर भी मरीजों को इंतजार क्यों?* 

सुश्री निर्मला भूरिया पेटलावद की विधायक होने के साथ प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी हैं। ऐसे में उनके विधानसभा क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर आम जनता की अपेक्षाएं स्वाभाविक रूप से अधिक हैं। यदि क्षेत्र के मरीजों को नियमित डायलिसिस जैसी जरूरी सुविधा के लिए दूसरे शहरों में जाना पड़ रहा है, तो यह व्यवस्था की समीक्षा का विषय है।

मंत्री के क्षेत्र में मशीन उपलब्ध होने के बावजूद सुविधा शुरू नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। क्या इस मामले की नियमित समीक्षा की गई? क्या संबंधित अधिकारियों से समयसीमा तय कर जवाब मांगा गया? और सबसे महत्वपूर्ण, क्या मरीजों को यह बताया गया कि सुविधा शुरू होने में देरी के कारण उनकी परेशानी कब तक बनी रहेगी?

जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी केवल योजनाओं की घोषणा और संसाधन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होती। उन संसाधनों का लाभ जरूरतमंदों तक समय पर पहुंचे, यह सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

 *बीएमओ को अगले एक-दो माह में सुविधा शुरू होने की उम्मीद* 

इस संबंध में पेटलावद सिविल अस्पताल के बीएमओ डॉ. अंतिम सोलंकी ने बताया कि मामले से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी एक से दो माह में डायलिसिस सुविधा शुरू हो सकती है।

हालांकि, यह बयान मरीजों के लिए तत्काल राहत की खबर नहीं है। मशीन आए करीब चार माह बीतने के बाद भी यदि सुविधा शुरू होने में एक-दो माह और लगने की संभावना है, तो मरीजों को कुल मिलाकर कई महीनों तक इंतजार करना पड़ सकता है। फिलहाल सुविधा शुरू होने की कोई निश्चित तारीख सामने नहीं आई है।

 *पार्ट्स और टेंडर प्रक्रिया के बीच मरीजों की जरूरत कहां?* 

मशीन शुरू करने के लिए आवश्यक पार्ट्स और टेंडर प्रक्रिया का हवाला दिया जा रहा है। तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सवाल यह है कि इन प्रक्रियाओं को समय रहते पूरा करने की जिम्मेदारी किसकी थी?

यदि मशीन के संचालन के लिए अतिरिक्त उपकरणों और संसाधनों की आवश्यकता थी, तो उनकी व्यवस्था पहले क्यों नहीं की गई? क्या संबंधित विभाग के पास इस कार्य को पूरा करने की कोई स्पष्ट समयसीमा है? और क्या मरीजों को राहत देने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई है?

इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है, क्योंकि डायलिसिस की प्रतीक्षा कर रहे मरीजों के लिए यह केवल प्रशासनिक देरी का मामला नहीं, बल्कि नियमित उपचार और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा गंभीर विषय है।

 *अब आश्वासन नहीं, सुविधा शुरू होने की तारीख चाहिए* 

पेटलावद के मरीजों को डायलिसिस मशीन शुरू होने की उम्मीद में महीनों से इंतजार करना पड़ रहा है। बीएमओ ने आगामी एक-दो माह में सुविधा शुरू होने की संभावना जताई है, लेकिन अब जरूरत केवल आश्वासन की नहीं, बल्कि स्पष्ट समयसीमा और जवाबदेही की है।

क्षेत्रवासियों की अपेक्षा है कि कैबिनेट मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया इस मामले में हस्तक्षेप करें, संबंधित विभाग से स्थिति की जानकारी लें और मशीन को शीघ्र शुरू करवाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।

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