मुंबई, 8 अगस्त (वार्ता) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने शनिवार को कहा कि उनकी पार्टी के सभी सांसद सोमवार, 10 अगस्त को नयी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे।
सुश्री सुले ने संवाददाताओं से कहा, “हम सोमवार सुबह 11 बजे महाराष्ट्र के मुद्दों और विकास कार्यों पर चर्चा करने के लिए प्रधानमंत्री से मिलने जा रहे हैं। वह केवल एक पार्टी के प्रधानमंत्री नहीं हैं, बल्कि पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं। हम निश्चित रूप से इस मुलाकात की तस्वीरें साझा करेंगे।”
हालांकि, संसद के मानसून सत्र के दौरान पेश किए जाने की संभावना वाले विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) विधेयक पर उन्होंने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा, “एनसीपी इस विधेयक के मौजूदा स्वरूप का स्पष्ट विरोध करती है। सरकार से हमारा विनम्र अनुरोध है कि इस विधेयक को जल्दबाजी में पारित न किया जाए, बल्कि इसे वापस लिया जाए। यदि सरकार इसे वापस नहीं लेना चाहती, तो इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजा जाना चाहिए ताकि सभी दलों के नेता मिलकर इस पर चर्चा कर सकें।” उन्होंने कहा, “अगर इसमें नशीले पदार्थों या आतंकवाद का पैसा शामिल है, तो निश्चित रूप से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन अगर गरीब बच्चों की शिक्षा या पोलियो के टीकों के लिए विदेशों से धन आ रहा है, तो उसे गलत पैसा कैसे कहा जा सकता है? हर विदेशी फंड को संदेह की नज़र से देखना गलत है।”
सुश्री सुले ने हाल ही में जंतर-मंतर पर संसद के दरवाजे बंद करके, आंसू गैस और पेलेट गन का इस्तेमाल कर छात्रों के प्रदर्शन को दबाने की घटना की पारदर्शी जांच की मांग की। जेन-जी (युवा पीढ़ी) के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा, “यह शिक्षित युवा पीढ़ी न तो सीबीआई से डरती है और न ही ईडी से। वे केवल संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों की मांग कर रहे हैं। मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत का धन्यवाद करती हूं जिन्होंने इस नई पीढ़ी को अधिक ईमानदार और देशभक्त बताकर उनकी सराहना की है।”
इसके अलावा, राकांपा (एसपी) की नेता ने ‘तकनीकी समस्याओं’ का हवाला देकर महाराष्ट्र सरकार द्वारा ऋण माफी योजना से 12 लाख किसानों को बाहर किए जाने पर देवेंद्र फडणवीस सरकार के प्रति नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा, “ऋण माफी को लेकर इस सरकार की संवेदनहीनता देखकर मैं स्तब्ध हूं। ‘लाड़की बहिन’ योजना और ऋण माफी योजना के समय को देखिए। जब चुनाव आए तो सरकार ने ये फैसले लिए, लेकिन चुनाव खत्म होते ही सरकार के हाथ कस गए हैं। किसानों के लिए बनी ऋण माफी योजनाओं पर जटिल नियम और शर्तें क्यों थूपी जा रही हैं? जबकि नीट परीक्षा पेपर लीक मामले के बाद सरकार को कोई नियम याद नहीं रहते।”
