एसएफआई ने जेएनयू के पीएचडी दाखिलों में लगाया आरक्षण नियमों के उल्लंघन का आरोप

नयी दिल्ली, 28 अक्टूबर (वार्ता) छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने बुधवार को आरोप लगाया कि दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में वैधानिक आरक्षण नियमों का गंभीर उल्लंघन किया गया है। संगठन का दावा है कि विश्वविद्यालय ने अनुसूचित जाति, जनजाति और दिव्यांग श्रेणियों के लिए निर्धारित कोटा की तुलना में कम सीटें विज्ञापित की हैं।

संगठन ने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग में दर्ज कराई गई उसकी शिकायतों पर संज्ञान लिया गया है। यहां प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में पूर्व राज्यसभा सांसद वृंदा करात, पश्चिम बंगाल की पूर्व मंत्री देबलीना हेम्ब्रम, एसएफआई के अखिल भारतीय अध्यक्ष आदर्श एम. साजी, एसएफआई की अखिल भारतीय संयुक्त सचिव और पूर्व जेएनयूएसयू अध्यक्ष आइशी घोष, जेएनयूएसयू उपाध्यक्ष गोपिका बाबू तथा एसएफआई जेएनयू सचिव सागर सिंगल ने विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आरक्षण लागू करने के तरीकों पर गंभीर सवाल उठाए।

एसएफआई के अनुसार, 29 सितंबर को सौंपी गई शिकायत के बाद आयोग ने आठ अक्टूबर को जेएनयू के कुलसचिव को नोटिस जारी कर इस संबंध में तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी थी। विश्वविद्यालय द्वारा तय समय सीमा (23 अक्टूबर) तक जवाब न देने पर आयोग ने 27 अक्टूबर को एक और नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर कार्रवाई करने या जवाब देने का अल्टीमेटम दिया था।

एसएफआई ने जेएनयू के पीएचडी ई-प्रॉस्पेक्टस 2026-27 के विश्लेषण का हवाला देते हुए बताया कि कुल 711 नियमित सीटों में से जनजाति उम्मीदवारों के लिए 7.5 प्रतिशत आरक्षण के तहत निर्धारित लगभग 53 सीटों के मुकाबले केवल 38 सीटें विज्ञापित की गई हैं। इसी तरह अनुसूचित जाति संवर्ग के लिए निर्धारित 15 प्रतिशत कोटे के अनुसार लगभग 107 सीटों के स्थान पर 103 सीटें विज्ञापित की गई हैं। संगठन ने दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए भी पांच प्रतिशत नियमानुसार अनुमानित 36 सीटों की जगह केवल 17 सीटें आवंटित करने का आरोप लगाया है।

संगठन ने इन गड़बड़ियों का मुख्य कारण सीट आवंटन की ‘माइक्रो-यूनिट’ व्यवस्था को बताया। इसके तहत विश्वविद्यालय की कुल सीटों के आधार पर आरक्षण तय करने के बजाय प्रत्येक केंद्र और उप-विषय के स्तर पर अलग-अलग आरक्षण लागू किया जाता है, जिससे कई सेंटरों में कम सीटें होने के कारण आरक्षित वर्गों को उनका वैधानिक हक नहीं मिल पाता।एसएफआई ने पिछले प्रवेश सत्रों में खाली रह गयी आरक्षित सीटों को डी-रिजर्व करने के प्रयासों का भी मुद्दा उठाया। संगठन ने मांग की है कि जारी दाखिला प्रक्रिया में तुरंत संशोधन कर आरक्षण रोस्टर को दुरुस्त किया जाए और पीएचडी दाखिला प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले सभी बैकलॉग सीटों को भरा जाए।

 

 

 

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