भुवनेश्वर, 28 अक्टूबर (वार्ता) चक्रवाती तूफान अर्नब के ओडिशा में सीधे टकराने से बचने के बावजूद राज्य में भारी बारिश जारी है, जिससे कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
चक्रवाती तूफान ‘अर्णब’ का बड़ा खतरा टलने से ओडिशा के लोगों ने राहत की सांस ली है, हालांकि मूसलाधार बारिश ने कई जिलों में जनजीवन बेहाल कर दिया है।
विशेष राहत आयुक्त कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि राज्य के गंजाम, गजपति, रायगढ़ा, कोरापुट, मलकानगिरि, नबरंगपुर, नुआपड़ा और कालाहांडी सहित कई जिलों में भारी बारिश हुई। राज्य के तटीय, पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों में भी व्यापक बारिश की खबर है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, इस दौरान किसी की जान जाने या संपत्ति को बड़े पैमाने पर नुकसान होने की सूचना नहीं है। हालांकि, कुछ स्थानों पर भूस्खलन और पेड़ों के उखड़ने की घटनाएं सामने आई हैं। लगातार हो रही बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है। इसका असर विशेष रूप से दक्षिणी ओडिशा में देखा गया है। उन्होंने कहा कि गंजाम जिले के कुछ तटीय इलाकों में समुद्री लहरों का पानी रिहायशी क्षेत्रों में घुसने से जलभराव की स्थिति बन गई।
गंजाम जिले के गोपालपुर निवासी एस रामुलु ने बताया, “हवा की गति काफी कम थी और हम चक्रवात की तबाही से बच गए। जबरदस्त बारिश हालांकि लगातार जारी है।”
ज्यादा नुकसान न होने पर लोगों ने राहत की सांस ली है लेकिन लगातार हो रही बारिश ने कृषि नुकसान की चिंता बढ़ा दी है। कई इलाकों में धान की खड़ी फसल, जो पकने और फूल आने के चरण में थी, पानी में डूब गई है। पुरी जिले के गोप के किसान कपिल प्रधान ने कहा, “खेत जलमग्न हो चुके हैं और नुकसान काफी ज्यादा हो सकता है। फसल बहुत अच्छी दिख रही थी लेकिन नुकसान के सटीक स्तर का पता बारिश थमने के बाद ही चल सकेगा।”
स्थानीय निवासियों ने कहा कि अतीत में आई प्राकृतिक आपदाओं के अनुभवों ने उन्हें मौसम संबंधी चेतावनियों के प्रति अधिक सतर्क बना दिया है। पारादीप के पास संधाकुड़ा के पारंपरिक समुद्री मछुआरे राजू बेहरा ने कहा, “1999 के महाचक्रवात ने हमें सिखाया कि चेतावनियों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अब जब भी कम दबाव का क्षेत्र बनने या तूफान आने का पूर्वानुमान होता है, तो मछुआरे समुद्र से दूर रहते हैं।” पुरी जिले के ब्रह्मगिरि निवासी दुर्गा मोहन महांती ने कहा कि लोगों ने सुरक्षा संबंधी सलाह का पालन किया और सुरक्षित स्थानों पर चले गए। इससे चक्रवात आपदा से निपटने की तैयारियों को परखने का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ।
तूफान का खतरा टलने के बाद अब राज्य भर में लगातार हो रही बारिश, जलभराव और फसलों के संभावित नुकसान से पैदा हुई स्थिति पर लोगों का ध्यान केंद्रित है।
