इंदौर: इस साल बारिश कम होने के कारण जल आपातकाल की स्थिति बनने की संभावना है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि इंदौर में पानी की बर्बादी रोकेगा कौन ? इसके उलट पानी विक्रेताओं और आरओ पानी का उपयोग करने वाले रहवासियों द्वारा लाखों लीटर पानी नालियों और सडक¸ों पर बहा दिया जाता है। नगर निगम कार्रवाई के लिए एमआईसी में प्रस्ताव पास होने का इंतज़ार कर रहा है।
शहर में इस साल सिर्फ 23 इंच पानी गिरा है, जो सामान्य बारिश 13 इंच एवं अच्छी बारिश की तुलना में 17 इंच बारिश कम हुई है। शहर में पानी की बर्बादी को लेकर पड़ताल करने पर जो जानकारी सामने आई है, वो जलसंकट से ज्यादा पानी व्यर्थ बहाने की है।
पानी का धंधा करने वाले आरओ प्लांट से 50 से 70 प्रतिशत पानी नालियों ओर ड्रैनेज लाइन में व्यर्थ बहा रहे है। विशेषज्ञों का कहना है कि घरों में लगने वाली आरओ मशीन से 24 घंटे और बोरिंग नर्मदा एवं तालाब के पानी से आरओ प्लांट चलाने वाले पानी विक्रेताओं द्वारा भी 50 से 70 प्रतिशत तक पानी बर्बाद हो जाता है। इतना ही नहीं पानी की बर्बादी रोकने के लिए नगर निगम, सरकार और प्रशासन द्वारा आज तक कोई कानून नहीं बनाया गया है। यही कारण है कि आज शहद में धड़ल्ले से आरओ प्लांट लगाकर पानी का धंधा किया जा रहा है। सख्त कानून नहीं होने से गली गली में आरओ मशीन लगाकर लाखों लीटर पानी नालियों और ड्रेनेज लाइन में बहाया जा रहा है। इंदौर में सवाल यही उठ रहा है कि पानी की बर्बादी रोकेगा कौन……?
सीधी बात
एमआईसी के बिना सीधे कार्रवाई नहीं कर सकते
नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल
* शहर में पानी की बर्बादी रोकने के क्या इंतजाम किए जा रहे है ?
आयुक्त – शहर में आरओ प्लांट वाले को जल संरक्षण के तहत वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और रिचार्ज साफ्ट लगाने के निर्देश दिए गए है।
* आरओ प्लांट वाले लाखों लीटर पानी बर्बाद कर रहे हैं और रिचार्ज सिस्टम भी नहीं है ?
आयुक्त – ऐसे लोगों को नोटिस देकर कार्रवाई करेंगे ।
* पानी बर्बादी रोकने के लिए कोई योजना बनाई है क्या ?
आयुक्त – पानी को लेकर रेगुलेशन, जुर्माना और अन्य बिंदुओं को लेकर महापौर परिषद में प्रस्ताव करेंगे। एमआईसी के बिना सीधे कार्रवाई नहीं कर सकते हैं।
जल बोर्ड गठन का आवश्यकता
इंदौर में पानी की बर्बादी रोकने के लिए स्वतंत्र जल बोर्ड गठन की आवश्यकता है। देश में चैन्नई का जल बोर्ड मॉडल से पानी की पूर्ति और बर्बादी दोनों स्थिति में फायदा मिला है। इसके बाद बंगलुरू, कोलकाता सहित कई शहरों में जल बोर्ड का गठन किया गया है। गुजरात के अहमदाबाद, सूरत, बड़ौदा सहित देश के कई राज्यों में पानी को लेकर जल बोर्ड गठन की तैयारियां की जा रही है।
कहते हैं एक्सपर्ट
इंदौर में पानी के धंधे पर रोकटोक नहीं : संदीप नेरूलकर
शहर में जीएसआईटीएस कॉलेज के संदीप नेरूलकर कहते हैं कि इंदौर में पानी का धंधा करने की कोई रोक टोक नहीं है। बोरिंग में पानी आया और आरओ मशीन लगाकर पानी बेचना शुरू। इन लोगों को राजनीतिक संरक्षण भी है। इंदौर में लाखों लीटर पानी आरओ मशीन एवं प्लांट के चलते नालियों ओर ड्रेनेज लाइन में बहाया जा रहा है। कोई रोक टोक नहीं है बर्बादी पर ।
मेरी राय में पानी के लिए सख्त कानून बनाया जाना चाहिए। साथ ही आरओ से निकले मिनरल रहित पानी सिंचाई और पीने को छोडक¸र कपड़े, बर्तन , आँगन धोने से लेकर हर तरह के काम में उपयोग किया जाना चाहिए।
* शहर में करीब 800 सौ आरओ प्लांट, घरों में लाखों की संख्या में आरओ मशीन, जिससे 70 प्रतिशत तक पानी बर्बाद होता है।
* आरओ मशीन से 180 टीडीएस वाले 8 लीटर पानी के लिए 20 लीटर पानी बर्बाद होता है।
* नर्मदा के पानी में आरओ की जरूरत नहीं होने पर भी रहवासियों द्वारा आरओ मशीन लगाकर पानी बर्बाद किया जा रहा है।
* बोरिंग के पानी में 70 और नर्मदा या तालाब के पानी से आरओ प्लांट में 50 प्रतिशत से ज्यादा पानी खराब होता है।
