
बैतूल। मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा जिले में नशा मुक्ति अभियान शुरू किया गया था, लेकिन यह अभियान वास्तविक तौर पर केवल औपचारिकता साबित हुआ। ग्रामीण इलाकों में शराब माफिया पूरी तरह हावी है और गांव-गांव अंग्रेजी शराब की आपूर्ति जारी है।
जानकारी के अनुसार, ठेकेदारों ने लाइसेंसी दुकानों के अलावा अवैध तरीके से वाहनों में शराब भरकर ग्रामीण इलाकों में पहुंचाई। सारणी थाना क्षेत्र में हाल ही में एक अवैध शराब से भरा वाहन जब्त हुआ, जिसमें कुछ नेताओं के संबंधी लोगों के नाम सामने आए। इसके बावजूद, आरोप है कि एक मुख्य आरोपी को संरक्षण दिया गया।
स्थानीय लोग बता रहे हैं कि ठेकेदार अपने कर्मचारियों के माध्यम से न केवल शराब की खेप वितरित कर रहे हैं बल्कि कई बार मारपीट भी की गई है। पुलिस ने मामले दर्ज किए हैं, जो वर्तमान में न्यायालय में लंबित हैं।
सारणी की वही लाइसेंसी दुकान, जिसके कर्मचारियों को रंगेहाथ पकड़ा गया था, अब भी अनवरत शराब बेच रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने आबकारी विभाग को लायसेंसी दुकान का लाइसेंस निलंबित करने की सिफारिश की थी, लेकिन अब तक विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जिला आबकारी अधिकारी अंशुमन सिंह चढ़ार से संपर्क करने के प्रयास असफल रहे। कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने कहा कि उन्हें अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है और वे मामले की जांच कर उचित कार्रवाई निर्देशित करेंगे। पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने आश्वासन दिया कि पूरी जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले ने जिले में नशा मुक्ति अभियान की वास्तविक स्थिति और आबकारी विभाग की लापरवाही को उजागर किया है।
