
ग्वालियर। शौर्य, पराक्रम और धर्मरक्षा के संकल्प का पर्व विजयादशमी 20 अक्टूबर को शहर के ऐतिहासिक एवं प्राचीन धार्मिक स्थल सिद्धपीठ श्री गंगादास जी की बड़ी शाला में पारंपरिक उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर शस्त्र पूजन के साथ साधु-संत शस्त्र संचालन का हैरतअंगेज प्रदर्शन भी करेंगे।
लक्ष्मीबाई कॉलोनी, पड़ाव स्थित सिद्धपीठ में दोपहर 12 बजे विजयादशमी उत्सव का शुभारंभ होगा। शाला के महंत पूरन वैराठी तथा पीठाधीश्वर महंत रामसेवकदास जी महाराज के सानिध्य में अंचल के साधु-संत एकत्रित होकर शस्त्रों का विधिवत पूजन करेंगे।
1857 के बलिदानी संतों के शस्त्रों की होगी पूजा
इस आयोजन का विशेष महत्व 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा है। मान्यता और शाला की परंपरा के अनुसार, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के साथ अंग्रेजों से संघर्ष करते हुए बलिदान देने वाले संतों के शस्त्रों का पूजन किया जाएगा। इनमें बरछी, कृपाण, कटारी, तलवार और चिमटे सहित विभिन्न पारंपरिक शस्त्र शामिल हैं। इस अवसर पर शाला की प्राचीन तोप भी चलाई जाएगी।
तीनों अनी अखाड़ों के निशानों का पूजन
विजयादशमी के अवसर पर शाला में निर्मोही, निर्वाणी और दिगंबर – तीनों अखाड़ों के निशानों का पूजन भी परंपरागत विधि-विधान से किया जाएगा। इसके बाद साधु-संत शस्त्र संचालन का प्रदर्शन करेंगे। शौर्य और साधना की इस परंपरा के माध्यम से धर्मरक्षा, त्याग और बलिदान के ऐतिहासिक प्रसंगों का स्मरण किया जाएगा। शाला की ओर से इस धार्मिक एवं पारंपरिक आयोजन में सभी श्रद्धालुओं को सादर आमंत्रित किया गया है।
