अहमदाबाद, 19 अक्टूबर (वार्ता) लंदन ओलंपिक 2012 के कांस्य पदक विजेता और भारतीय ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष गगन नारंग ने ओलंपियन तथा अर्जुन पुरस्कार विजेता अनुराज सिंह के साथ मिलकर निशानेबाज एथलीटों के लिए ‘अभ्यास’ लॉन्च की है। यह एक डिजिटल निशानेबाजी डायरी है जिसे ‘प्रोजेक्ट अमरजीत’ के तहत विकसित किया जा रहा है। इस प्लेटफॉर्म को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि निशानेबाजी एथलीट अपनी ट्रेनिंग का रिकॉर्ड रख सकें, अपनी प्रगति को ट्रैक कर सकें और समय के साथ अपने प्रदर्शन को बेहतर ढंग से समझ सकें।
निशानेबाजी को निखाने वाली ऐप ‘अभ्यास’ पूरी तरह से मुफ्त उपलब्ध होगी, इसके लिए कोई सब्सक्रिप्शन शुल्क नहीं देना होगा। इस पहल का मकसद यह है कि एथलीटों को ट्रेनिंग रिकॉर्ड रखने और प्रदर्शन का विश्लेषण करने के लिए डिजिटल टूल्स मिल सकें, चाहे उनकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो या वे कहीं भी ट्रेनिंग कर रहे हों।
इस पहल पर गगन नारंग ने कहा, “अपने पूरे शूटिंग करियर के दौरान, ट्रेनिंग डायरी रखने से मुझे अपने प्रदर्शन को केवल स्कोर से परे जाकर समझने में मदद मिली। इससे मैं अपने पुराने ट्रेनिंग सेशन को देख पाता था, पैटर्न समझ पाता था और यह जान पाता था कि क्या अच्छा काम कर रहा है और कहाँ सुधार की ज़रूरत है। हम ‘अभ्यास’ के ज़रिए हर शूटर तक यह सुविधा पहुँचाना चाहते हैं। यह प्लेटफॉर्म हमेशा के लिए मुफ्त रहेगा, क्योंकि किसी एथलीट को ऐसे टूल तक पहुँचने के लिए अपनी आर्थिक स्थिति पर निर्भर नहीं रहना पड़ना चाहिए। तकनीक एथलीटों को उनकी ट्रेनिंग बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकती है, लेकिन कड़ी मेहनत, अनुशासन और लगन तो उन्हें खुद ही दिखानी होगी। हमारा उद्देश्य शूटर्स को एक ऐसा साधन देना है जो उनके पूरे सफर में उनका साथ दे सके।”
इस प्लेटफॉर्म में डिजिटल ट्रेनिंग और प्रतियोगिता डायरी, शॉट प्लॉटिंग, प्रदर्शन की ट्रैकिंग, उपकरणों का रिकॉर्ड, और तकनीकी टिप्पणियों व व्यक्तिगत विचारों को दर्ज करने की जगह शामिल होगी। इन सुविधाओं का उद्देश्य एथलीटों को अपनी ट्रेनिंग का एक व्यवस्थित रिकॉर्ड बनाने और समय के साथ अपने प्रदर्शन में आने वाले पैटर्न को पहचानने में मदद करना है। ‘अभ्यास’ का उद्देश्य प्रशिक्षण सत्र, तकनीकी बदलावों और प्रगति का रिकॉर्ड रखकर एथलीटों और कोचों के बीच बातचीत को बढ़ावा देना है। युवा और उभरते हुए शूटर्स के लिए, अपनी ट्रेनिंग को रिकॉर्ड करने और उसकी समीक्षा करने की आदत डालने से उन्हें अपने प्रदर्शन के बारे में बेहतर समझ मिल सकती है, और वे उन पहलुओं की पहचान कर सकते हैं जिन पर ध्यान देने की ज़रूरत है।
यह पहल ‘प्रोजेक्ट अमरजीत’ का हिस्सा है, जिसे नारंग और सिंह ने नारंग की माँ, अमरजीत नारंग की याद में शुरू किया है। इसे उनकी जयंती के मौके पर लॉन्च करने की योजना है, जिससे इस पहल का परिवार के लिए एक खास व्यक्तिगत महत्व जुड़ जाता है।

