
देवास। क्षेत्र में आलू की फसल की बुवाई की तैयारियां शुरू हो गई हैं। किसान खेतों को तैयार करने के साथ बीज की व्यवस्था में जुट गए हैं। बाजार में आलू के भाव को लेकर फिलहाल किसानों को अपेक्षित राहत नहीं मिल रही है, इसके बावजूद आगामी दिनों में आलू के उचित भाव की उम्मीद के साथ किसान आलू की बोवनी कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि आलू की खेती से होने वाली आय उनके कृषि चक्र का महत्वपूर्ण आधार है।
आलू की खेती में बीज, जुताई, खाद, दवा, सिंचाई और मजदूरी सहित कई तरह की लागत आती है। ऐसे में किसानों की निगाह इस बात पर है कि फसल तैयार होने के समय मंडी में किस तरह के भाव मिलते हैं। पिछले समय में भाव में उतार-चढ़ाव के कारण किसानों को कई बार लागत निकालने में भी चुनौती का सामना करना पड़ा है। किसानों का कहना है कि आलू की फसल से मिलने वाली आमदनी का असर केवल एक सीजन तक सीमित नहीं रहता। इसी आय से अगली फसल की तैयारी, कृषि लागत और अन्य जरूरी खर्चों की व्यवस्था होती है। इसलिए बाजार में मंदी के बावजूद खेत खाली छोड़ना उनके लिए आसान विकल्प नहीं है। फिलहाल क्षेत्र में किसान खेतों की तैयारी और बीज की व्यवस्था में जुटे हैं। आने वाले दिनों में बुवाई का काम और तेज होने की संभावना है। अब किसानों की उम्मीद अच्छी पैदावार के साथ फसल के समय बेहतर बाजार भाव मिलने पर टिकी है। किसानों को आलू के भाव चार-पांच रुपए किलो ही मिल रहे हैं, लेकिन आने वाले समय में किसान भाव बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं।
ग्राम बड़ी चुरलाई में किसान जगपाल सिंह सिकरवार ने अपने खेत में आलू की कुफरी ज्योति किस्म की बुवाई शुरू की है। वे अपने एफपीओ के माध्यम से क्षेत्र के अन्य किसानों को भी आलू का बीज उपलब्ध करा रहे हैं। इस बार बीज की कीमत करीब 12 से 20 रुपए प्रति किलो तक बताई जा रही है। किसान अपनी जरूरत और उपलब्धता के अनुसार बीज की व्यवस्था कर रहे हैं। किसान जगपालसिंह का कहना है कि इस बार पानी का स्तर बहुत ही नीचे हैं और ऐसे में गेहूं, चना, आलू के लिए सिंचाई में परेशानी होगी।
