ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जीआरपी ने मानव तस्करी के एक संदिग्ध नेटवर्क का खुलासा करते हुए म्यांमार की चार युवतियों को बरामद किया है। मामले में दो म्यांमार मूल के युवकों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब युवतियों के भारत पहुंचने और उन्हें जम्मू-कश्मीर ले जाने की कथित योजना की जांच कर रही है।
ट्रेन में मिला पहला सुराग
ग्वालियर जीआरपी को सूचना मिली थी कि स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस में एक संदिग्ध विदेशी युवक सफर कर रहा है। पुलिस ने ट्रेन की जांच कर म्यांमार के 25 वर्षीय मुबीन को पकड़ा। पूछताछ में उसके साथी मोहम्मद हसन के बारे में जानकारी मिली।
इसके बाद जीआरपी की टीम ने उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक किराए के मकान पर दबिश दी। यहां 35 वर्षीय मोहम्मद हसन मिला और उसके पास से चार म्यांमार की युवतियों को बरामद किया गया।
बांग्लादेश के शरणार्थी शिविर से भारत लाने का दावा
पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आया है कि युवतियों को बांग्लादेश के कुतुपालोंग शरणार्थी शिविर से कथित तौर पर भारत लाया गया था। उनके भारत में प्रवेश के रास्ते और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, युवतियों को जम्मू-कश्मीर ले जाकर शादी कराने की कथित योजना थी। कुछ रिपोर्टों में चार युवतियों में दो के नाबालिग होने की बात कही गई है, हालांकि उनकी उम्र और पहचान की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद स्पष्ट होगी।
पूछताछ में भाषा बनी चुनौती
युवतियों को हिंदी की जानकारी नहीं होने के कारण पुलिस को पूछताछ में परेशानी हुई। इसके लिए अनुवाद की मदद ली गई। अब जीआरपी आरोपियों के संपर्क, यात्रा से जुड़े विवरण और भारत में युवतियों को लाने वाले नेटवर्क की अन्य कड़ियों की जांच कर रही है।
पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में मानव तस्करी का संगठित नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।
