जबलपुर: हाईकोर्ट से छह दशक से भरण-पोषण नहीं देने पर 11 महीने के कारावास की सजा भुगत रहे मजदूर को राहत मिली है। न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने आवेदक की आर्थिक स्थिति को देखते हुए निर्देश दिया कि बकाया राशि का 10 प्रतिशत जमा करने पर उसे रिहा किया जाए। शेष 90 प्रतिशत राशि छह महीने में चार किश्तों में जमा करनी होगी।दरअसल छिंदवाड़ा निवासी शाहिद कुरैशी का निकाह 26 अप्रैल 2012 को हुआ था। दंपती के दो बच्चे हैं। विवाद के बाद दोनों अलग रहने लगे।
पत्नी ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का आवेदन किया था। 21 जनवरी 2025 को फैमिली कोर्ट, छिंदवाड़ा ने एकतरफा आदेश में पत्नी और बच्चों को प्रतिमाह 3,750 रुपये भरण-पोषण देने के निर्देश दिए। भुगतान नहीं होने पर पत्नी ने वसूली आवेदन दिया। फैमिली कोर्ट ने 11 मई 2026 को 77 महीने की बकाया राशि 2,88,750 रुपये जमा नहीं करने पर शाहिद को 11 महीने के कारावास का आदेश दिया। इसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने आर्थिक स्थिति को देखते हुए 10 प्रतिशत राशि जमा करने पर रिहाई और शेष राशि छह महीने में चार किश्तों में चुकाने की शर्त पर याचिका का निराकरण कर दिया।
