विभागीय जांच से पहले सुनवाई जरूरी, हाईकोर्ट ने आरोप-पत्र किया निरस्त

जबलपुर: हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में साफ किया कि पुलिस विनियम की धारा 270 के तहत दंड आदेश निरस्त कर नई विभागीय कार्यवाही शुरू करने से पहले संबंधित कर्मचारी को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने बिना सुनवाई का अवसर दिए पारित आदेश को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत मानते हुए 4 जुलाई 2023 के आदेश और उसके आधार पर जारी 25 सितंबर 2023 के आरोप-पत्र को निरस्त कर दिया।

याचिकाकर्ता सहायक उप निरीक्षक और आरक्षक के पद पर मौगंज में पदस्थ दोनों पुलिसकर्मी एक नवंबर 2022 की रात गश्त पर थे। बस स्टैंड पर घायल व्यक्ति मिलने की सूचना पर वे मौके पर पहुंचे और उसे अस्पताल पहुंचाया। घटना को रोजनामचे में दुर्घटना के रूप में दर्ज किया गया। बाद में इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित वीडियो के आधार पर प्रारंभिक जांच हुई, जिसमें घटना को दुर्घटना दर्ज करने में लापरवाही मानी गई।

इसके बाद 31 मार्च 2023 को दोनों को ‘सेंसर’ की लघु सजा दी गई। बाद में पुलिस विनियम की धारा 270 के तहत 4 जुलाई 2023 को दंड आदेश निरस्त कर नई विभागीय जांच के निर्देश दिए गए। हाईकोर्ट ने पाया कि इस आदेश से पहले कर्मचारियों को न तो कारण बताओ नोटिस दिया गया और न सुनवाई का अवसर। कोर्ट ने मामला संबंधित प्राधिकारी को नए सिरे से विचार के लिए भेजते हुए पूर्ण अवसर देने और कार्रवाई अधिमानतः तीन माह में पूरी करने के निर्देश दिए।

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