ग्रीन हाइड्रोजन क्या है? भारत के पेट्रोल-डीजल, उद्योग और रोजगार पर क्या होगा असर

नई दिल्ली। भारत स्वच्छ ऊर्जा के विकल्पों को बढ़ाने पर जोर दे रहा है और इसी दिशा में ग्रीन हाइड्रोजन को अहम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में इसका इस्तेमाल बढ़ने पर ऊर्जा, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

ग्रीन हाइड्रोजन को पानी से इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के जरिए बनाया जाता है। इसमें बिजली का इस्तेमाल पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में अलग करने के लिए किया जाता है। जब इस बिजली की आपूर्ति सौर या पवन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा से होती है, तो इसे ग्रीन हाइड्रोजन कहा जाता है।

*पेट्रोल-डीजल की जगह लेगी ग्रीन हाइड्रोजन?*

ग्रीन हाइड्रोजन को फिलहाल पेट्रोल और डीजल का सीधा विकल्प नहीं माना जा सकता। हालांकि, भारी परिवहन और ऐसे औद्योगिक क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल बढ़ सकता है, जहां सीधे बिजली का इस्तेमाल करना आसान नहीं है। लंबे समय में इसका विस्तार तेल और गैस पर निर्भरता कम करने में योगदान दे सकता है।

*उद्योगों के लिए क्यों महत्वपूर्ण?*

स्टील, उर्वरक और रिफाइनरी जैसे क्षेत्रों में हाइड्रोजन का इस्तेमाल पहले से होता है। इन उद्योगों में पारंपरिक हाइड्रोजन की जगह कम-कार्बन विकल्पों का इस्तेमाल बढ़ाने से औद्योगिक उत्सर्जन कम करने में मदद मिल सकती है।

ग्रीन हाइड्रोजन के लिए इलेक्ट्रोलाइजर, नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र, स्टोरेज और परिवहन जैसी सुविधाओं की भी जरूरत होगी। इससे इस पूरे क्षेत्र में नई तकनीक और निवेश की मांग बढ़ सकती है।

*रोजगार के कितने अवसर?*

इस सेक्टर के विस्तार के साथ इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण, सोलर और विंड एनर्जी, हाइड्रोजन स्टोरेज, परिवहन, प्लांट संचालन और तकनीकी सेवाओं में रोजगार के नए अवसर विकसित हो सकते हैं। हालांकि, रोजगार का वास्तविक स्तर इस उद्योग के विस्तार और निवेश की गति पर निर्भर करेगा।

कुल मिलाकर, ग्रीन हाइड्रोजन भारत के ऊर्जा बदलाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। इसका असर तुरंत पेट्रोल-डीजल को हटाने के रूप में नहीं, बल्कि धीरे-धीरे उद्योगों और भारी परिवहन में स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाने के रूप में देखा जा सकता है।

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