जबलपुर। मध्यप्रदेश का महाकौशल अंचल प्राकृतिक संसाधनों के मामले में समृद्ध माना जाता है। क्षेत्र के अलग-अलग जिलों में आयरन ओर, मैंगनीज, बॉक्साइट, लेटराइट, डोलामाइट और चूना पत्थर जैसे खनिज मिलने की जानकारी है। इसके बावजूद खनिज आधारित बड़े प्रोसेसिंग प्लांट और मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों की संख्या सीमित होने के कारण स्थानीय स्तर पर इन संसाधनों का पूरा आर्थिक लाभ नहीं मिल पा रहा है।
महाकौशल से निकलने वाले कच्चे खनिज का एक हिस्सा दूसरे राज्यों के औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंचता है, जहां इसकी प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के बाद उत्पाद तैयार किए जाते हैं। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि खनिज के आसपास ही प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां विकसित हों, तो रोजगार के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।
खनिज है, लेकिन प्रोसेसिंग इंडस्ट्री की कमी
महाकौशल के कई हिस्सों में खनिज संसाधनों की उपलब्धता बताई जाती है, लेकिन बड़े पैमाने पर खनिज आधारित उद्योगों का नेटवर्क विकसित नहीं हो पाया है। इसके कारण कच्चे माल को उन राज्यों तक भेजना पड़ता है, जहां पहले से स्टील, मेटल, सीमेंट और अन्य संबंधित उद्योग स्थापित हैं।
इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों के मुताबिक माइनिंग से मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभ के अलावा असली आर्थिक गतिविधि प्रोसेसिंग, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और तैयार उत्पाद की सप्लाई चेन से पैदा होती है। यदि इसका बड़ा हिस्सा स्थानीय स्तर पर विकसित हो, तो रोजगार और कारोबार के नए अवसर बन सकते हैं।
महाकौशल में कहां कौन सा खनिज
बालाघाट: मैंगनीज
कटनी: बॉक्साइट, चूना पत्थर, आयरन
सिहोरा: आयरन, लेटराइट, डोलामाइट
पनागर-मझौली: आयरन ओर, मैंगनीज
जबलपुर-मंडला: डोलामाइट, मार्बल, लेटराइट
सिवनी: मैंगनीज, ग्रेनाइट, डोलामाइट और लेटेराइट
सोने की मौजूदगी की भी जानकारी
कटनी और जबलपुर क्षेत्र में सोने की मौजूदगी की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सिहोरा में करीब 150 एकड़ और कटनी में करीब 16 एकड़ क्षेत्र में सोने की मौजूदगी बताई गई है। इन संसाधनों के वास्तविक भंडार और व्यावसायिक उपयोग से जुड़े निष्कर्ष संबंधित सर्वे और आधिकारिक प्रक्रिया पर निर्भर करेंगे।
रेलवे के जरिए बड़े पैमाने पर माल परिवहन
महाकौशल समेत देश के विभिन्न हिस्सों से खनिज और अन्य औद्योगिक कच्चे माल की ढुलाई में रेलवे की महत्वपूर्ण भूमिका है। उपलब्ध रेलवे आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 में देशभर में 137.9 मिलियन टन माल का परिवहन हुआ। अगस्त 2025 में यह आंकड़ा 130.9 मिलियन टन था। इस तरह सालाना आधार पर माल ढुलाई में 5.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
इसी अवधि में लौह अयस्क की ढुलाई में भी वृद्धि दर्ज होने की जानकारी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अगस्त में करीब 0.14 मिलियन टन आयरन ओर का लदान हुआ, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 67.44 प्रतिशत अधिक बताया गया है।
जबलपुर रेल मंडल के आंकड़ों में भी आयरन की ढुलाई का उल्लेख है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अगस्त में करीब 0.14 मिलियन टन आयरन का परिवहन हुआ।
उद्योग लगाने के लिए निवेश और नीति दोनों जरूरी
खनिज कारोबारी विनोद श्रीवास्तव के मुताबिक महाकौशल में मैंगनीज, आयरन और लेटराइट समेत कई खनिज उपलब्ध हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर बड़े प्लांट नहीं होने के कारण कच्चा माल बाहर जाता है। उनका कहना है कि यदि यहां प्रोसेसिंग प्लांट लगाए जाएं तो रोजगार और सरकारी राजस्व दोनों बढ़ सकते हैं। हालांकि, उनका मानना है कि ऐसे उद्योगों के लिए बड़े निवेश की जरूरत होगी और सरकार को सब्सिडी जैसे प्रोत्साहन देने पर विचार करना चाहिए।
फेडरेशन ऑफ एमपी चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष हिमांशु खरे के अनुसार महाकौशल में माइनिंग लीज लेने वाले बड़े निवेशकों की ओर से स्थानीय स्तर पर बड़ी प्रोसेसिंग इकाइयां स्थापित करने की कमी रही है। उनका कहना है कि क्षेत्र की खनिज क्षमता और निवेश की संभावनाओं को लेकर बेहतर मार्केटिंग की जरूरत है, जिससे निवेशकों को उपलब्ध संसाधनों की जानकारी मिल सके।
जियोमिन इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के हेड अमित ठाकुर का कहना है कि खनिज आधारित इकाइयां स्थानीय स्तर पर स्थापित होने से रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। उनके मुताबिक अभी कई तैयार उत्पाद दूसरे औद्योगिक केंद्रों से आते हैं। महाकौशल को बेहतर कनेक्टिविटी के साथ बड़े औद्योगिक और इंपोर्ट-एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जाना चाहिए।
कांग्रेस नेता दिनेश यादव ने इस मुद्दे को लंबे समय से चली आ रही समस्या बताते हुए कहा कि महाकौशल में खनिज संपदा होने के बावजूद स्थानीय उद्योगों का पर्याप्त विस्तार नहीं हो सका है। उनके मुताबिक सरकार को खनिज आधारित उद्योगों की स्थापना को लेकर ठोस पहल करनी चाहिए।
वहीं, सांसद आशीष दुबे का कहना है कि क्षेत्र में व्यापार और उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि निवेश में रुचि रखने वाले उद्योगपतियों के साथ काम किया जा रहा है और आने वाले समय में खनिज आधारित इकाइयों के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
स्थानीय स्तर पर वैल्यू एडिशन पर जोर
महाकौशल में खनिज आधारित उद्योगों के विस्तार की मांग के पीछे मुख्य तर्क यही है कि कच्चे माल के साथ उसकी प्रोसेसिंग भी क्षेत्र में हो। इससे खनन के अलावा परिवहन, इंजीनियरिंग, मशीनरी, सर्विस सेक्टर और मैन्युफैक्चरिंग जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
उद्योग से जुड़े लोगों का सुझाव है कि सरकार ऐसी नीतियां तैयार करे, जिनसे स्थानीय स्तर पर निवेश करने वाले उद्योगों को प्रतिस्पर्धी माहौल और जरूरी सुविधाएं मिलें। टैक्स प्रोत्साहन, इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजली, पानी, सड़क और रेल कनेक्टिविटी जैसे मुद्दे निवेश के फैसले में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
अवैध उत्खनन रोकने की भी मांग
महाकौशल में खनिज आधारित उद्योगों के साथ अवैध रेत और पत्थर उत्खनन को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। प्रस्ताव के तौर पर यह सुझाव दिया गया है कि रेत और पत्थर के उत्खनन तथा वितरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए।
एक मॉडल के तहत सरकारी एजेंसी के माध्यम से सीमित और नियमों के अनुरूप उत्खनन, सरकारी डिपो में सामग्री का संग्रह और ऑनलाइन व्यवस्था के जरिए बिक्री जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। इससे खनन प्रक्रिया की निगरानी और राजस्व संग्रह को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
बड़ा सवाल
महाकौशल के सामने चुनौती सिर्फ अपने खनिज संसाधनों की पहचान और खनन की नहीं है। असली चुनौती यह है कि खनिज से तैयार उत्पाद तक की आर्थिक श्रृंखला का कितना हिस्सा क्षेत्र के भीतर विकसित किया जा सकता है।
यदि स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ती है, तो इसका असर रोजगार, निवेश, कारोबार और सरकारी राजस्व पर पड़ सकता है। अब नजर इस बात पर है कि महाकौशल की खनिज संपदा को स्थानीय औद्योगिक विकास से जोड़ने के लिए नीति स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
