सेकेंड-हैंड धनुष से वर्ल्ड कप गोल्ड जीतने के बाद कुमकुम मोहोड़ का अगला लक्ष्य ओलंपिक पोडियम

नयी दिल्ली, (वार्ता) अभी कुछ समय पहले तक कुमकुम मोहोड़ भारतीय तीरंदाजी जगत के बाहर ज्यादा चर्चित नाम नहीं थीं। लेकिन कुछ ही हफ्तों में अमरावती की 17 वर्षीय तीरंदाज ने भारत को आर्चरी वर्ल्ड कप 2026 में स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई और साथ ही एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय टीम में भी जगह बना ली।

हालांकि, एशियाई खेल उनके करियर का अगला बड़ा पड़ाव है, लेकिन कुमकुम का मानना है कि उनका सबसे बड़ा लक्ष्य आइची-नागोया 2026 से भी आगे है। कुमकुम ने ओलंपिक्सडॉटकॉम से बात करते हुए कहा, “हमारा ध्यान आने वाले सभी टूर्नामेंटों पर है। आखिरकार हमारा लक्ष्य भारत के लिए ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतना है, जो अब तक हासिल नहीं हो सका है। हमारा लक्ष्य लॉस एंजेलिस 2028 ओलंपिक है।”

पिछले महीने शंघाई में आयोजित आर्चरी वर्ल्ड कप 2026 के दूसरे स्टेज में कुमकुम ने ओलंपियन दीपिका कुमारी और अंकिता भकत के साथ मिलकर भारत को महिला रिकर्व टीम स्पर्धा का स्वर्ण पदक दिलाया। यह 2021 के बाद इस स्पर्धा में भारत का पहला स्वर्ण था। दिलचस्प बात यह है कि शंघाई में कुमकुम ने जिस उपकरण का इस्तेमाल किया, वह पांच साल पुराना सेकेंड-हैंड धनुष था, जिसे वह 2018 में इस खेल से जुड़ने के बाद से इस्तेमाल कर रही हैं।

देश की दिग्गज तीरंदाजों के साथ इतने बड़े मंच पर उतरना किसी भी युवा तीरंदाज के लिए दबाव भरा अनुभव हो सकता था, लेकिन कुमकुम ने इस चुनौती को अलग नजरिए से देखा और पूरे आत्मविश्वास के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।

कुमकुम ने कहा, “यह कभी युवा या अनुभवी होने का मामला नहीं था। आखिरकार हम सभी को 70 मीटर की दूरी से निशाना लगाना था। जाहिर है, उनके पास मुझसे कहीं ज्यादा अनुभव था, लेकिन मेरा काम सिर्फ अपने शॉट्स पर ध्यान देना था। बाकी चीजें उन्होंने संभाल लीं। कुल मिलाकर यह मेरे लिए शानदार अनुभव रहा।”

टूर्नामेंट का सबसे यादगार लम्हा भारत की सेमीफाइनल में दक्षिण कोरिया पर जीत रही। कोरियाई टीम में टोक्यो 2020 की स्वर्ण पदक विजेता कांग चाए-यंग जैसी दिग्गज तीरंदाज शामिल थीं।

हालांकि, कुमकुम का कहना है कि मुकाबले के दौरान उन्होंने प्रतिद्वंद्वी टीम की प्रतिष्ठा के बारे में बिल्कुल नहीं सोचा। उन्होंने आगे कहा, “जब मैं खेल रही थी, तब मेरे दिमाग में दक्षिण कोरिया नहीं था। मेरा पूरा ध्यान सिर्फ अपने खेल और अपनी टीम पर था। हमारे सामने कौन खड़ा है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था।”

कुमकुम ने यह भी बताया कि आर्चरी प्रीमियर लीग और देश-विदेश के शीर्ष तीरंदाजों के खिलाफ दबाव भरे मुकाबलों में खेलने के अनुभव ने उनकी मानसिक मजबूती को बढ़ाने में मदद की। उन्होंने कहा, “आर्चरी प्रीमियर लीग में भी बड़ी संख्या में दर्शक होते हैं, इसलिए हम ऐसे माहौल के अभ्यस्त हो जाते हैं। विदेशी तीरंदाजों के साथ रहना और उनके खिलाफ खेलना भी हमें काफी अनुभव देता है।”

शंघाई में चीन के खिलाफ खेले गए फाइनल मुकाबले में कुमकुम का धैर्य और मानसिक मजबूती पूरी तरह दिखाई दी। जब मुकाबले का फैसला शूट-ऑफ तक पहुंचा, तब 17 वर्षीय तीरंदाज ने मेजबान दर्शकों के भारी दबाव और शोरगुल के बीच सटीक 10 अंक का निशाना लगाकर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई।

कुमकुम ने कहा, “मैं खास तौर पर 10 अंक लगाने के बारे में नहीं सोच रही थी। मेरा पूरा ध्यान सिर्फ सही तरीके से शॉट लेने पर था और उसी का परिणाम 10 के रूप में मिला।”

शंघाई से लौटने के कुछ ही दिनों बाद कुमकुम का शानदार प्रदर्शन हरियाणा के सोनीपत में आयोजित अंतिम एशियाई खेल चयन ट्रायल्स में भी जारी रहा। देश की कई शीर्ष रिकर्व तीरंदाजों के बीच प्रतिस्पर्धा करते हुए उन्होंने क्वालिफिकेशन स्टेज में शीर्ष स्थान हासिल किया। दूसरे स्टेज में छह मुकाबले जीते और अंततः कीर्ति शर्मा के बाद दूसरे स्थान पर रहकर एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय टीम में जगह पक्की की।

जापान में होने वाले एशियन गेम्स के लिए भारत की महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम में कीर्ति शर्मा, कुमकुम मोहोड़ और अंकिता भकत शामिल हैं। वहीं, चार बार ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकीं दीपिका कुमारी इस बार एशियाई खेलों की टीम में जगह बनाने से चूक गईं।

 

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