वोटर लिस्ट स्पेशल रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पर चुनाव आयोग का कड़ा बयान, सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए जाने का दावा

नई दिल्ली, देश भर में चल रही वोटर लिस्ट की स्पेशल पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर हाल ही में मीडिया में आए अंदरूनी मतभेदों के खुलासे के बाद भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने आधिकारिक तौर पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। आयोग ने एक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि एसआईआर से जुड़े तमाम फैसले शुरू से ही पूरी तरह से एकमत और सर्वसम्मति से लिए गए हैं, जिन पर मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ-साथ दोनों चुनाव आयुक्तों की भी पूर्ण स्वीकृति रही है। यह सफाई ऐसे समय में आई है जब कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा कुछ मामलों पर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं।

विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की मांग

इस पूरे विवाद के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में भारी हंगामा मच गया है और विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर संस्था की विश्वसनीयता और निष्पक्षता को नुकसान पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने याद दिलाया कि इसी साल अप्रैल में 73 विपक्षी राज्यसभा सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए एक नया नोटिस ऑफ मोशन राज्यसभा के चेयरमैन को सौंपा था, जो अभी भी पेंडिंग है। वहीं, आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज और अन्य विपक्षी सांसदों ने भी कड़ा रोष व्यक्त करते हुए कहा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए इस मामले पर संसद में कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।

16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में तेजी से जारी है एसआईआर का तीसरा चरण, राजनीतिक सरगर्मी तेज

फिलहाल देश के 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों—जिनमें मिजोरम, ओडिशा, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, कर्नाटक, नागालैंड, झारखंड, त्रिपुरा, महाराष्ट्र और मेघालय शामिल हैं—में एसआईआर का तीसरा चरण सुचारू रूप से चल रहा है। निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि वोटर डेटाबेस के प्रबंधन और पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए आयोग पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हालांकि, विपक्षी दलों के कड़े तेवर और आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों को देखते हुए यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, जिस पर राजनीतिक जानकारों की गहरी नजर बनी हुई है।

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