नयी दिल्ली, 22 सितंबर (वार्ता) यूरोपीय संसद की उद्योग, अनुसंधान एवं ऊर्जा समिति (आईटीआरई) के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की।
इस अवसर पर डॉ. सिंह ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए का शीघ्र और प्रभावी कार्यान्वयन दोनों पक्षों की सामूहिक प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने यूरोपीय संसद से समझौते पर शीघ्र हस्ताक्षर और अनुमोदन के लिए निरंतर समर्थन की अपेक्षा जतायी। उन्होंने कहा कि यह समझौता व्यवसायों, उपभोक्ताओं और कुशल पेशेवरों के लिए नए अवसर पैदा करने के साथ भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी को और गति दे सकता है।
उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, उन्नत सामग्री, जैव प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग और 6जी जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया।
उन्होंने स्वच्छ एवं हरित प्रौद्योगिकियों, जलवायु, पर्यावरण और हरित हाइड्रोजन के क्षेत्र में भी मजबूत साझेदारी की अपील की। उन्होंने बताया कि भारत-ईयू व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद के तहत अपशिष्ट से हाइड्रोजन, समुद्री प्रदूषण और इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों के पुनर्चक्रण जैसे क्षेत्रों में चार वर्षों में 600 लाख यूरो के संयुक्त निवेश से सहयोगात्मक अनुसंधान को समर्थन दिया जा रहा है। प्रस्तावित भारत-ईयू इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग प्रौद्योगिकी एवं परीक्षण नवाचार केंद्र तथा हाइड्रोजन वैली से जुड़े सहयोग पर भी चर्चा हुई। डॉ. सिंह ने कहा कि हरित हाइड्रोजन के क्षेत्र में सहयोग से भविष्य में व्यापार और निवेश के नए अवसर खुल सकते हैं।
बैठक में भारत के अनुसंधान एवं नवाचार कार्यक्रमों और यूरोपीय संघ के ‘होराइजन यूरोप’ कार्यक्रम के साथ भारत के जुड़ाव पर भी चर्चा हुई। डॉ. सिंह ने कहा कि अनुसंधान एवं नवाचार ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के केंद्र में हैं और भारत उच्च प्रभाव वाले अनुसंधान, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा उद्योग की भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है। यूरोपीय संसद की प्रतिनिधिमंडल सदस्य एंजेलिका विन्ज़िग ने भारत को यूरोपीय संघ का प्रमुख रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि प्रतिनिधिमंडल की यात्रा का उद्देश्य भारत की औद्योगिक एवं प्रौद्योगिकी नीतियों को समझना और सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करना है।
