
जबलपुर। सागर जिले के बंडा और शाहगढ़ तहसील में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में निष्पक्ष जांच व दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही किये जाने की मांग आधारित जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया कि जिला व पुलिस प्रशासन के द्वारा आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही जारी है। सरकार ने घटना को गंभीरता से लेते हुए न्यायिक आयोग का गठन किया है।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे तथा जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए याचिकाकर्ता को न्यायिक आयोग के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता प्रदान की है।
दमोह निवासी याचिकाकर्ता वैभव सिंह की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था सागर जहरीले शराब कांड में लगभग तीन दर्जन व्यक्तियों की मौत हो गयी है तथा कई लोग गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। इस भीषण त्रासदी ने प्रदेशभर को हिलाकर रख दिया था। घटना से पहले संदिग्ध शराब के स्टाक को कथित रूप से क्लीन चिट दिए जाने और पूर्व में प्राप्त शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं किए जाने के संबंध में जांच आवश्यक है। जांच प्रक्रिया को किसी भी संभावित प्रशासनिक प्रभाव से मुक्त रखना आवश्यक है। याचिका में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सागर के स्थानांतरित की अंतरिम राहत चाही गयी थी।
याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से अभी तक की कार्यवाही के संबंध में ब्यौरा पेश करते हुए बताया गया कि घटना की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया गया है। हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश व्ही पी एस चौहान को जांच का दायित्व सौंपा गया है। जांच के लिए तीन माह की समय सीमा निर्धारित की गयी है। याचिकाकर्ता अपना पक्ष व शिकायत न्यायिक आयोग के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश के साथ याचिका का निराकरण कर दिया।
