नयी दिल्ली, 21 सितंबर (वार्ता) दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर ) के दौरान कुछ मतदाताओं को जारी नोटिस को लेकर स्पष्ट किया है कि नोटिस मिलने का मतलब मतदाता सूची से नाम हटाया जाना नहीं है।
सीईओ कार्यालय ने आज कहा है कि बिना मतदाता को सुनवाई का अवसर दिए और उचित आदेश जारी किये किसी भी नाम को मतदाता सूची से हटाया नहीं जायेगा। उन्होंने कहा कि 31 अगस्त को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची बूथ स्तर अधिकारियों (बीएलओ) को जमा कराये गये गणना प्रपत्रों में मतदाताओं द्वारा दी गयी जानकारी के आधार पर तैयार की गयी है। नोटिस ऐसे मतदाताओं को भेजे जा रहे हैं, जिनकी प्रविष्टियां पिछली गहन पुनरीक्षण वाली मतदाता सूची से लिंक नहीं हो सकीं या लिंकिंग प्रक्रिया में तार्किक विसंगतियां पायी गयी। मसौदा सूची सीईओ दिल्ली की वेबसाइट, निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ), सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (एईआरओ) के कार्यालयों और निर्धारित मतदान केंद्रों पर उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि नोटिस पाने वाले मतदाता संबंधित ईआरओ/एईआरओ के समक्ष आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना जवाब दाखिल कर सकते हैं। निर्वाचन आयोग की ओर से सुझाये गये दस्तावेजों की सूची संकेतात्मक है और अंतिम निर्णय संबंधित ईआरओ द्वारा उपलब्ध रिकॉर्ड तथा बीएलओ की रिपोर्ट के आधार पर मामले-दर-मामले किया जायेगा। दावे और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक पूरी की जानी है और अंतिम मतदाता सूची चार नवंबर को प्रकाशित होगी।
सीईओ कार्यालय ने बताया कि सभी मतदान केंद्रों पर विशेष शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। पात्र नागरिक, जिनका नाम मसौदा सूची में नहीं है, 30 सितंबर तक फॉर्म-6 के माध्यम से नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। कार्यालय ने यह भी कहा कि वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और दिव्यांग मतदाताओं की सहायता के लिए बीएलओ/एईआरओ से संपर्क किया जा सकता है। बेघर, ट्रांसजेंडर और यौनकर्मियों के लिए 23 और 24 सितंबर को शाम पांच से रात नौ बजे तक विशेष शिविर लगाये जायेंगे। इसके अलावा, शिकायतों की सुनवाई सुगम बनाने के लिए सभी विधानसभा क्षेत्रों में अतिरिक्त एईआरओ तैनात किये जा रहे हैं।
दिल्ली में एसआईआर के तहत 31 अगस्त को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की गयी थी। इसके बाद नामों की जांच, दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है।
