अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों और ड्रोन साइट्स पर 24 घंटे में दूसरी बार बड़ा हमला किया है। तेल टैंकर पर हमले के बाद ट्रंप प्रशासन ने यह कड़ी कार्रवाई की है।
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई तेज करते हुए पिछले 24 घंटों के भीतर दूसरी बार भीषण एयर स्ट्राइक की है। अमेरिकी सेना ने शनिवार को होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित कई ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
इस हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अब तक की सबसे कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि ईरान ने अपनी हरकतें बंद नहीं कीं, तो उसका अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है।
ईरान के इन ठिकानों पर हुई बमबारी
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप के सीधे निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है। इस हमले में ईरान के मिलिट्री सर्विलांस इंफ्रास्ट्रक्चर, कम्युनिकेशन सिस्टम्स, एयर डिफेंस साइट्स और ड्रोन भंडारण केंद्रों को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है।
इसके अलावा, अमेरिकी विमानों ने उन ठिकानों को भी निशाना बनाया जहां से ईरान समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की क्षमता रखता है। ईरानी मीडिया ने भी दक्षिणी शहर सिरिक के पास जबरदस्त धमाकों की पुष्टि की है, जहां कई प्रोजेक्टाइल एक दूरसंचार टावर से टकराए हैं।
क्यों भड़का अमेरिका?
यह थी हमले की वजह अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने हाल ही में हुए अंतरिम शांति समझौते और सीजफायर के नियमों का उल्लंघन किया है,। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने शनिवार तड़के पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर ‘M/T Kiku’ पर वन-वे अटैक ड्रोन से हमला किया था।
यह टैंकर करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर जा रहा था। इससे पहले शुक्रवार को भी अमेरिका ने ईरान पर हमला किया था, जो सिंगापुर के मालवाहक जहाज ‘M/V Ever Lovely’ पर हुए ईरानी हमले का जवाब था।
डोनाल्ड ट्रंप और जेडी वेंस की दोटूक चेतावनी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि अमेरिकी विमानों ने ईरानी मिसाइल और ड्रोन ठिकानों को निशाना बनाया है क्योंकि उन्होंने फिर से सीजफायर तोड़ा है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा, ‘एक समय ऐसा आ सकता है जब हम समझदारी से काम न ले पाएं… अगर सैन्य तरीके से काम पूरा करना पड़ा, तो ईरान का अस्तित्व ही नहीं रहेगा’।
वहीं, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी स्पष्ट कर दिया है कि हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा। वेंस ने कहा कि अगर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर कोई भ्रम है तो ईरान को बातचीत करनी चाहिए, न कि कार्गो जहाजों पर हमला।
खतरे में दो हफ्ते पुराना शांति समझौता
हैरानी की बात यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच महज दो सप्ताह पहले ही एक अंतरिम शांति समझौता हुआ था,। लेकिन 24 घंटे में दो बड़े हमलों ने इस समझौते को पूरी तरह पटरी से उतार दिया है,। जानकारों का मानना है कि यदि ईरान ने पलटवार किया, तो यह स्थिति एक पूर्ण युद्ध (Full-scale war) में बदल सकती है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर गंभीर संकट आ सकता है।
