दिल्ली के सीईओ का स्पष्टीकरण: एसआईआर नोटिस का मतलब यह नहीं है कि वोटर का नाम हटा दिया जाएगा

नयी दिल्ली, 20 सितंबर (वार्ता) दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने रविवार को कहा कि मतदाता सूची के जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान कुछ मतदाताओं को दिए जा रहे नोटिस सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा हैं और नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि उन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे।

सीईओ की ओर से यह स्पष्टीकरण पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान वीआईपी और अन्य “चिह्नित मतदाताओं” को नोटिस दिए जाने के संबंध में प्रिंट और सोशल मीडिया में आई खबरों के बीच आया है।

सीईओ कार्यालय ने कहा कि एसआईआर का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रह जाए और कोई भी अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो। निर्वाचन आयोग ने 2026 की एसआईआर प्रक्रिया के तहत दिल्ली में यह अभियान चलाने का आदेश दिया था।

सीईओ के बयान के अनुसार, 31 अगस्त को प्रकाशित मतदाता सूची का मसौदा बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा एकत्र किए गए गणना प्रपत्रों के माध्यम से मतदाताओं की ओर से दी गयी जानकारी के आधार पर तैयार किया गया था। मतदाता सूची का मसौदा सीईओ दिल्ली की वेबसाइट, निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) और सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (एईआरओ) के कार्यालयों के अलावा निर्धारित मतदान केंद्रों पर भी उपलब्ध कराया गया है।

घर-घर सत्यापन के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) ने अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरे नाम वाले (एएसडीडी) मतदाताओं की सूची भी तैयार की। सीईओ कार्यालय ने कहा कि मसौदा मतदाता सूची में शामिल मतदाताओं को मोटे तौर पर दो श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी में वे मतदाता हैं, जो अपना नाम या अपनी संतान के नाम को पिछले गहन पुनरीक्षण की मतदाता सूची से जोड़ने में सफल रहे हैं। दूसरी श्रेणी में वे मतदाता हैं, जो ऐसा संबंध स्थापित नहीं कर सके। जिन मतदाताओं का नाम पिछले गहन पुनरीक्षण की मतदाता सूची से नहीं जोड़ा जा सका है, उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इसके अलावा, उन मतदाताओं को भी नोटिस दिए जा रहे हैं, जिनके संबंध में अधिकारियों ने ‘तार्किक विसंगतियां’ बताई हैं। हालांकि, सीईओ कार्यालय ने जोर देकर कहा कि इस तरह का नोटिस जारी किया जाना मतदाता का नाम सूची से हटाने का फैसला नहीं है।

कार्यालय ने कहा, “किसी भी नाम को सुनवाई का अवसर दिए बिना तथा उचित, कारणयुक्त और अपील योग्य आदेश के बिना हटाया नहीं जा सकता।” कार्यालय ने बताया कि ये नोटिस चुनाव आयोग के ईसीआईनेट (ईसीआईएनईटी) में आंकड़ों में सुधार की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए जारी किए जा रहे हैं।

सीईओ कार्यालय ने इस सुझाव को भी खारिज कर दिया कि नोटिस की प्रक्रिया अपने आप में प्रभावित मतदाताओं के लिए अस्तित्व का संकट है। कार्यालय ने कहा कि प्रिंट और सोशल मीडिया के कुछ हिस्सों में उठाई जा रही चिंताएं अपनाई जा रही प्रक्रिया को सही रूप में नहीं दर्शाती हैं।

नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाता संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) या बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) के समक्ष अपना जवाब और सहायक दस्तावेज जमा कर सकते हैं। सीईओ कार्यालय ने कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित दस्तावेजों की सूची केवल उदाहरणात्मक है और पूरी सूची नहीं है। इसका मतलब है कि व्यक्तिगत मामलों पर फैसला करते समय ईआरओ अन्य संबंधित दस्तावेजों और सामग्री पर भी विचार कर सकते हैं।

प्रत्येक मामले में अंतिम फैसला वैधानिक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) उपलब्ध दस्तावेजों और बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट पर विचार करने के बाद करेंगे। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के बयान के अनुसार, नोटिसों का निपटारा 29 अक्टूबर तक पूरा किया जाना है, जबकि अंतिम मतदाता सूची चार नवंबर को प्रकाशित की जाएगी।

निर्वाचन आयोग की ओर से प्रकाशित एसआईआर की रूपरेखा में भी मतदाता सूची को अंतिम रूप देने से पहले नोटिस, सुनवाई और सत्यापन की प्रक्रिया का प्रावधान है। सीईओ कार्यालय ने दोहराया कि पुनरीक्षण प्रक्रिया का उद्देश्य पात्र मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है।

इस बीच, दिल्ली सीईओ की दैनिक एसआईआर बुलेटिन के अनुसार, 31 अगस्त से 19 सितंबर के बीच फॉर्म-6 के 84,263 आवेदन प्राप्त हुए। इसके साथ ही 19 सितंबर तक प्राप्त कुल आवेदनों की संख्या बढ़कर 2,96,663 हो गई है। इनमें 30 अगस्त तक प्राप्त 2,12,400 आवेदन भी शामिल हैं।

निर्वाचन आयोग के मतदाता सेवा मंच के माध्यम से पात्र नागरिक पंजीकरण करा सकते हैं, मतदाता सूची से जुड़ी जानकारी में बदलाव कर सकते हैं और अपने आवेदनों की स्थिति देख सकते हैं।

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