जबलपुर: हाईकोर्ट ने असिस्टेंट प्रोफेसर (इतिहास) की चयन प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं। न्यायमूर्ति विशाल धगत की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि याचिका के लंबित रहने के दौरान की जाने वाली कोई भी नियुक्ति हाई कोर्ट के अंतिम आदेश के अधीन रहेगी। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सतेन्द्र ज्योतिषी, अभिषेक मिश्रा, अनुजाय मिश्रा व वरुण दुबे ने पैरवी की। मामला विमल कुमार तिवारी व अन्य बनाम मध्य प्रदेश शासन व अन्य से संबंधित है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सतेन्द्र ज्योतिषी ने बताया कि एमपी-पीएएसी ने वर्ष 2025 में इतिहास विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे लंबे समय से उच्च शिक्षा विभाग के अधीन महाविद्यालयों में अतिथि विद्वान के रूप में कार्य कर रहे हैं। याचिका में चयनित अभ्यर्थियों की मार्किंग और उनके द्वारा दी गई जानकारी पर आपत्ति जताते हुए चयन प्रक्रिया को नियम विरुद्ध बताया गया है। साथ ही पात्र अतिथि विद्वानों के लिए निर्धारित 25 प्रतिशत प्रावधान का अनुचित लाभ दिए जाने का आरोप लगाया गया है। हाई कोर्ट ने प्रतिवादियों से जवाब मांगा है।
