जबलपुर: हाईकोर्ट ने कहा कि केवल संदेह के आधार पर अभियुक्त को दोषसिद्ध नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने तीरथ उर्फ छोटू टेकाम की अपील स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट से मिली 10 वर्ष की सजा का आदेश निरस्त कर दिया और उसे आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।मामले में अभियोजन की ओर से प्रस्तुत डीएनए-एफएसएल रिपोर्ट में अभियुक्त को बच्चे का जैविक पिता नहीं पाया गया। प्रकरण में अधिवक्ता मनोज कुशवाहा एवं कौशलेंद्र सिंह ने पैरवी की। हाई कोर्ट ने माना कि वैज्ञानिक साक्ष्य अभियुक्त को घटना से जोड़ने के बजाय उससे अलग करते हैं।
इसके अलावा अभियोजन साक्ष्य में भी महत्वपूर्ण विरोधाभास पाए गए। अभियुक्त की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि अभियोजन अपराध को संदेह से परे प्रमाणित नहीं कर सका। हाई कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद माना कि अभियुक्त के विरुद्ध पर्याप्त स्वतंत्र और ठोस साक्ष्य नहीं हैं। ऐसी स्थिति में संदेह का लाभ दिया जाना आवश्यक है। कोर्ट ने 12 दिसंबर 2024 को ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित दोषसिद्धि एवं सजा का निर्णय निरस्त कर दिया। साथ ही निर्देश दिया कि यदि अभियुक्त किसी अन्य मामले में आवश्यक नहीं है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए।
