जबलपुर: हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि नियमित डिग्री कोर्स के साथ दूरस्थ या पार्ट टाइम डिप्लोमा कोर्स किया जा सकता है। न्यायमूर्ति आनंद पाठक व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने इस आधार पर एकलपीठ का आदेश निरस्त करते हुए अपीलार्थी को राहत प्रदान की।
दरअसल यह मामला पन्ना निवासी वृंदावन अहिरवार की ओर से दायर किया गया था। जिसमें कहा गया कि ग्राम पंचायत बगोहा, पन्ना में ग्राम रोजगार सहायक के पद के लिए जारी विज्ञापन में वृंदावन मेरिट सूची में प्रथम स्थान पर था। उसने माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय से नियमित बीकाम के साथ पार्ट टाइम डीसीए कोर्स किया था। दूसरे स्थान पर रहे रामस्वरूप यादव ने इस आधार पर आपत्ति की। जिला स्तरीय चयन समिति ने आपत्ति स्वीकार करते हुए वृंदावन के 50 अंक काट दिए। इसके खिलाफ दायर याचिका एकलपीठ ने खारिज कर दी थी। इसके बाद वृंदावन ने अपील की। युगलपीठ के समक्ष दलील दी गई कि विश्वविद्यालय की अधिसूचना व स्पष्टीकरण में डीसीए को पार्ट टाइम कोर्स बताया गया है, जिसे नियमित डिग्री के साथ किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट व अन्य हाईकोर्ट के निर्णय भी प्रस्तुत किए गए। इन आधारों पर युगलपीठ ने अपील स्वीकार कर ली।
