सतना। स्व. जगदम्बा प्रसाद खरे द्वारा गणेश उत्सव परंपरा की नींव रखी गई। दवा की बोतल से शुरू हुआ सजावट का सफर आज भव्य मंदिर तक पहुंच गया है।
शहर में गणेश उत्सव की कई परंपराएं वर्षों से चली आ रही हैं, लेकिन खरे परिवार का गणेश उत्सव अपनी 84 वर्ष पुरानी परंपरा और अनूठी सजावट के लिए खास पहचान रखता है। पन्ना जिले से सतना आकर बसे खरे परिवार में इस उत्सव की शुरुआत स्वर्गीय जगदम्बा प्रसाद खरे ने महज 11 वर्ष की उम्र में की थी। उन्होंने करीब 54 वर्षों तक गणेश जी की सेवा और उत्सव की परंपरा को निभाया। उनके निधन के बाद अब उनके बेटों और पोतों द्वारा इस विरासत को आगे बढ़ाया जा रहा हैं।
दवा की बोतल से शुरू हुआ था सजावट का सफर
गणेश उत्सव के शुरुआती दौर में सीमित साधनों के बीच स्व. जगदम्बा प्रसाद खरे दवा की खाली शीशियों से आकर्षक सजावट तैयार करते थे। समय के साथ सजावट में ट्यूबलाइट, चावल के दाने और मखाने जैसी सामग्री का प्रयोग भी किया गया। वर्तमान में थर्माकोल से बनाए गए आकर्षक मंदिर, फूलों और अन्य सजावटी सामग्री से गणेश जी का दरबार तैयार किया जाता है। खास बात यह है कि सजावट के लिए परिवार बाहर से कारीगर नहीं बुलाता। जन्माष्टमी के दो दिन बाद से ही परिवार के सदस्य मिलकर दिन-रात मेहनत करते हैं और अगले गणेश उत्सव के लिए दरबार तैयार करते हैं।
एक साल तक सजा रहता है दरबार
खरे परिवार की परंपरा में यह भी खास है कि गणेश उत्सव के दौरान की गई सजावट पूरे वर्ष सुरक्षित रखी जाती है। अगले गणेश उत्सव की तैयारियों के समय पुरानी सजावट हटाकर नए स्वरूप में दरबार सजाया जाता है। उत्सव के दौरान प्रतिदिन दोपहर 12 बजे और शाम 8 बजे महाआरती होती है, जिसमें परिवार के सदस्यों के साथ श्रद्धालु भी शामिल होते हैं।
वर्तमान में स्व. जगदम्बा प्रसाद खरे के बेटे अरविंद खरे, मुकेश खरे, पवन खरे, शैलेन्द्र खरे और स्व. सुरेंद्र खरे का परिवार इस परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। वहीं नई पीढ़ी में शिवांशु, शिवम, ऋषि और विपुल खरे भी इस 84 वर्ष पुरानी धार्मिक और पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए जुटे हैं।
पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहा परिवार
अरविंद खरे ने बताया कि इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उन्हें बेहद संतोष और खुशी मिलती है। गणेश उत्सव हमारे लिए केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारे पिता स्व. जगदम्बा प्रसाद खरे की स्मृतियों से जुड़ी आस्था है। उन्होंने जिस परंपरा की शुरुआत अपने समय में की थी, उसे परिवार की ओर से आज भी पूरी श्रद्धा और निरंतरता के साथ निभाया जा रहा है।
10 दिनों का उत्सव बेहद महत्वपूर्ण
शिवम खरे ने बताया कि परिवार वर्षों से चली आ रही गणेश उत्सव की परंपरा को पूरी श्रद्धा के साथ निभा रहा है। 10 दिनों का यह उत्सव परिवार के लिए बेहद खास होता है। पूजा और आरती के दौरान सभी सदस्य उत्साह के साथ शामिल होते हैं और मिलकर गणेशोत्सव मनाते हैं।
100 साल की परंपरा पूरी करने का संकल्प
अमन खरे ने बताया कि परिवार के बुजुर्गों ने जिस परंपरा की शुरुआत की थी, उसे आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्हें उत्सव मनाते देखकर हम बड़े हुए हैं और उन्हीं के आशीर्वाद से यह परंपरा लगातार आगे बढ़ रही है। हमारा प्रयास है कि गणेश उत्सव की यह परंपरा 100 वर्ष पूरे करे। इसके बाद भी भगवान गणेश की इच्छा और आशीर्वाद से यह परंपरा आगे बढ़ती रहेगी।
