सिंगरौली : 903 करोड़ की प्रस्तावित परियोजना, वर्षों की तैयारी और अब एलाइनमेंट बदलने के बाद ठप प्रक्रिया ने चितरंगी से सिंगरौली तक के लोगों की चिंता बढ़ा दी है।प्रयागराज से सिंगरौली को जोड़ने वाला एनएच-135 सी आखिर कब जमीन पर उतरेगा, यही सबसे बड़ा सवाल बन गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग 135सी का प्रस्तावित मार्ग प्रयागराज से होकर चितरंगी-बगदरा होते हुए सिंगरौली तक जुड़ता है। सिंगरौली, चितरंगी, बगदरा हिस्से के विकास को लेकर लंबे समय से सर्वे, एलाइनमेंट और भू-अर्जन की प्रक्रिया चलती रही है। उपलब्ध दस्तावेजों में भी स्वीकृत एलाइनमेंट में अस्थायी निर्माण और अतिक्रमण के कारण आगे की भू-अर्जन प्रक्रिया प्रभावित होने तथा वैकल्पिक एलाइनमेंट तैयार करने के निर्देश का उल्लेख है। यही स्थिति अब क्षेत्रीय लोगों के बीच चर्चा का विषय है। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना में देरी का सीधा असर चितरंगी और पूरे सिंगरौली जिले की प्रयागराज से सड़क कनेक्टिविटी पर पड़ रहा है। उनका आरोप है कि जनप्रतिनिधियों ने इस महत्वपूर्ण परियोजना को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दी। लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि एलाइनमेंट में बदलाव के पीछे स्थानीय स्तर पर कई तरह के हित जुड़े रहे। कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ भाजपा नेताओं ने अपने हितों के अनुरूप परियोजना को प्रभावित करने का प्रयास किया।
सांसद से ठोस पहल के प्रगति का इंतजार
सीधी-सिंगरौली सांसद डॉ. राजेश मिश्रा द्वारा केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय को पत्र देने और मुलाकात करने की पहल जरूर सामने आई है, लेकिन क्षेत्रवासियों का कहना है कि अब उन्हें केवल पत्राचार नहीं, बल्कि नए एलाइनमेंट, भू-अर्जन और निर्माण की स्पष्ट समयसीमा चाहिए। एनएच-135 सी से जुड़ी सरकारी प्रक्रिया में पहले भी परियोजना के मार्ग और भू-अर्जन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। विधानसभा के रिकॉर्ड में भी इस मार्ग के मोरवा तक विस्तार और वैकल्पिक जोड़ से संबंधित सवाल दर्ज हैं। अब जनता चाहती है कि सरकार स्पष्ट करे, नया एलाइनमेंट कब स्वीकृत होगा, भू-अर्जन कब पूरा होगा और निर्माण कार्य की वास्तविक शुरुआत कब होगी, यही जवाब क्षेत्र के विकास की दिशा तय करेगा।
क्षेत्र के जनप्रतिनिधि खामोस, क्षेत्र में असंतोष
प्रयागराज-सिंगरौली प्रस्तावित नेशनल हाईवे-135सी के एलाइनमेंट निरस्त होने के बाद आगे की कार्रवाई ठण्डेबस्ते में चली गई है। इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर कथित नेताओं की ऐसी वक्र दृष्टि लगी कि मामला पूरी तरह से खटाई में चला गया। क्षेत्र में चर्चा है कि जनप्रतिनिधि प्रस्तावित नेशनल हाईवे के मामले में खामोस हैं। अन्य सड़को को लेकर सोशल मीडिया में खूब प्रचार-प्रसार कराया जाता है। लेकिन इस नेशनल हाईवे के मामले में बात सामने आते ही ऐसे भाजपा नेताओं के गले रूंध जाते हैं। आखिरकार नेताओं की खामोसी को लेकर ग्रामीणजन भी तरह-तरह के सवाल उठा रहे हैं और अब यह मामला धीरे-धीरे जोर पकड़ता जा रहा है। हालांकि इसका असर अभी तो नही दलगत चुनाव में जरूर दिखेगा। भाजपा-कांग्रेसियों को इससे प्रभावित लोग जवाब मांगेंगे।
