
सीधी। जिले के ग्राम छुहिया की कीचड़ से अटी, दुर्गम और पथरीली पगडंडियां कोई रास्ता नहीं, बल्कि आम जनता की बेबसी की सीमा रेखा हैं। जब एक वृद्ध की सांसे अटकीं और शरीर बीमारी से पस्त हुआ, तो सरकार के बड़े-बड़े वादों की एम्बुलेंस वहां तक नहीं पहुंची। पहुंची तो सिर्फ एक लकड़ी की खाट (डोली-खटोली) का सहारा और कंधों पर तैरता बेबस अपनों का दर्द। दो से ढाई किलोमीटर तक दुर्गम रास्ते, घुटनों तक भरे कीचड़ और हादसों को न्योता देती ढलानों से होकर परिजनों को उस मरीज को किसी तरह मुख्य मार्ग तक घसीटना पड़ा।
एक महिला इन्फ्लुएंसर ने इस वीडियो के जरिए हुक्मरानों के जमीर को झकझोरते हुए सीधा वार किया है। जिस रास्ते पर एक इंसान कदम रखने से कांपता हो, वहां आपकी चार पहियों की एम्बुलेंस उड़ान भरकर आएगी क्या। परिजनों का दर्द छलका तो सदियों से सह रहे दंश का सच सामने आ गया दशकों बीत गए, सरकारें आईं और गईं मगर छुहिया गांव तक पहुंचने के लिए आज भी एक समतल सड़क मयस्सर नहीं हुई।
