
नई दिल्ली। शनिवार को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शुरुआत हुई, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडपम से अपने संबोधन के जरिए किया। अपने भाषण में पीएम ने सदस्य देशों से ठोस नतीजों पर जोर देने की अपील की और कहा कि आपसी सम्मान और सर्वसम्मति ही ब्रिक्स की मजबूती की बुनियाद है।
पीएम मोदी ने बताया कि भारत की अध्यक्षता पीपल-सेंट्रिक और ह्यूमैनिटी-फर्स्ट सोच पर आधारित है, जिसमें लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता को प्राथमिकता दी गई। आम नागरिकों को इस मंच से जोड़ने के मकसद से इस दौरान 350 से ज़्यादा बैठकें आयोजित की गईं। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि अगले शिखर सम्मेलन तक 10 सूत्रों वाला एक व्यापक सुधार रोडमैप तैयार कर लिया जाए।
वैश्विक व्यवस्था पर तीखी टिप्पणी
मोदी ने वैश्विक शासन ढांचे की तुलना एक पिरामिड से करते हुए कहा कि सत्ता और फैसले शीर्ष पर केंद्रित रहते हैं, जबकि नीचे मौजूद देश उन फैसलों का असर तो झेलते हैं पर उन्हें आकार देने में उनकी कोई भूमिका नहीं होती। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ आज दुनिया के संकटों की अगली कतार में खड़ा है, लेकिन निर्णय-प्रक्रिया में हाशिये पर है।
अगले सम्मेलन तक रोडमैप का लक्ष्य
पीएम ने विकासशील देशों के सामने आ रहे संरचनात्मक असंतुलन को रेखांकित करते हुए 10-सूत्रीय शासन-सुधार रोडमैप का मसौदा अगले शिखर सम्मेलन तक तैयार करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि “विशेषाधिकार के पिरामिड” को एक ऐसे “साझेदारी के मंच” में बदलना होगा, जहां हर देश की आवाज़ सुनी जाए, हर सदस्य की भागीदारी हो, और मानवता का कल्याण हर पहल के केंद्र में रहे।
