नई दिल्ली। दिल्ली में दुनिया की बड़ी ताकतों का जमावड़ा शुरू हो चुका है… रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत पहुंच चुके हैं और अब नजरें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर हैं। 7 साल बाद शी जिनपिंग का भारत दौरा… और इसके बीच हो रहा है BRICS का शिखर सम्मेलन। ऐसे में सवाल सिर्फ ये नहीं है कि शी और मोदी की मुलाकात होगी क्या… बल्कि बड़ा सवाल है—इस मुलाकात से भारत-चीन रिश्तों में क्या बदलेगा?
BRICS के मंच पर भारत, चीन और रूस एक साथ होंगे। पुतिन के साथ प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत हो चुकी है, जिसमें व्यापार, ऊर्जा और रक्षा जैसे मुद्दे अहम रहे।
अब शी जिनपिंग के साथ बातचीत में सबसे संवेदनशील मुद्दा होगा – सीमा
2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत-चीन रिश्तों में भरोसे का संकट आया। इसलिए अगर दोनों नेता सीमा पर स्थिरता और तनाव कम करने की दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो इसका असर सिर्फ सीमा पर नहीं, बल्कि दोनों देशों के पूरे रिश्ते पर पड़ सकता है।
लेकिन दूसरी तरफ है व्यापार
भारत को चीन के साथ बड़े व्यापारिक रिश्ते के बीच अपने व्यापार घाटे और बाजार तक पहुंच की चिंता है। वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में चीन की भूमिका को पूरी तरह नजरअंदाज करना आसान नहीं है।
यानी भारत के सामने चुनौती है—सुरक्षा और आर्थिक जरूरतों के बीच संतुलन। और इसके साथ जुड़ा है सबसे बड़ा रणनीतिक सवाल—अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा। भारत अमेरिका के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी मजबूत कर रहा है, लेकिन चीन उसका पड़ोसी भी है और बड़ा व्यापारिक साझेदार भी।
इसलिए मोदी-शी मुलाकात का असली संदेश शायद यही होगा—भारत किसी एक खेमे में नहीं, बल्कि अपने हितों के हिसाब से रिश्तों का संतुलन तय करेगा। BRICS में पुतिन और शी की मौजूदगी के बीच भारत के पास एक ही मंच पर बड़ी ताकतों से बात करने का मौका है… और यही इस शिखर सम्मेलन को भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनाता है।
