लाहौर, ड्रेसिंग रूम लीक मामले में रिजवान और इमाम एनसीसीआईए के सामने पेश हुए। एनसीसीआईए संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और मोबाइल फोन की भी जांच कर रहा है।
पाकिस्तान के क्रिकेटर मोहम्मद रिजवान और इमाम-उल-हक ड्रेसिंग रूम की कथित जानकारी लीक होने के मामले में लाहौर स्थित नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी के सामने पेश हुए।
इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए पाकिस्तान की टीम से हटाए जाने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने रिजवान, इमाम समेत सात खिलाड़ियों के मोबाइल फोन अपने कब्जे में लिए थे। बाद में इन मोबाइल फोन को जांच के लिए एनसीसीआईए को भेजे जाने की जानकारी सामने आई।
संदिग्ध लेन-देन मामले में भी जांच
एनसीसीआईए रिजवान और इमाम से जुड़े कुछ वित्तीय मामलों और संदिग्ध लेन-देन की भी जांच कर रही है। जांचकर्ता सीरीज से पहले और उसके दौरान दोनों खिलाड़ियों के बैंक खातों में हुए लेन-देन की जानकारी देख रहे हैं। जांच में अगर कोई संदिग्ध लेन-देन सामने आता है तो उसके पैसों के स्रोत की भी पड़ताल की जाएगी। हालांकि, इस मामले में अभी जांच जारी है और किसी खिलाड़ी के खिलाफ आरोप साबित नहीं हुए हैं।
पाकिस्तान टीम से निकालें गए
रिजवान और इमाम उन सात खिलाड़ियों में शामिल थे, जिन्हें इंग्लैंड के खिलाफ शुरुआती दो टेस्ट में पाकिस्तान के खराब प्रदर्शन के बाद टीम से हटा दिया गया था। दोनों समेत सात खिलाड़ियों को वापस घर भेज दिया गया था और उनकी जगह सात नए खिलाड़ियों को टीम में शामिल किया गया था।
कथित जानकारी लीक होने के मामले में नोटिस मिलने के बाद रिजवान और इमाम एनसीसीआईए के सामने पेश हुए। दोनों ने अपने लिखित जवाब जमा किए और जांच का पूरा जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। रिपोर्ट के मुताबिक, एनसीसीआईए दोनों खिलाड़ियों से आगे भी पूछताछ कर सकती है।
क्या है इस जांच का असली मकसद?
जांच का एक अहम हिस्सा ये पता लगाना है कि टेस्ट सीरीज के दौरान टीम से जुड़ी संवेदनशील जानकारी बाहर कैसे पहुंची। इसी वजह से खिलाड़ियों के मोबाइल फोन की भी जांच की जा रही है।
इंग्लैंड के खिलाफ शुरुआती दो टेस्ट में हार के बाद पाकिस्तान क्रिकेट में कई बदलाव किए गए। पीसीबी ने रिजवान, इमाम, सलमान आगा, अली उस्मान, आमिर जमाल, अवैस जफर और खुर्रम शहजाद को टीम से हटाकर घर भेज दिया था। इसके अलावा पीसीबी ने टेस्ट हेड कोच सरफराज अहमद और गेंदबाजी कोच उमर गुल को भी उनके पद से हटा दिया।
PCB का क्या कहना है?
पीसीबी चेयरमैन मोहसिन नकवी ने खिलाड़ियों को हटाने के फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि बोर्ड के पास बदलाव करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। उन्होंने कहा कि इन बदलावों का मतलब खिलाड़ियों को हमेशा के लिए टीम से बाहर करना नहीं है, बल्कि खराब प्रदर्शन के बीच उनकी जगह दूसरे खिलाड़ियों को मौका देना है।
इस बीच, पीसीबी चेयरमैन के सलाहकार आमिर मीर ने भी खिलाड़ियों के व्यवहार से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों के बाद आंतरिक अनुशासनात्मक जांच शुरू होने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि जांच पीसीबी की तय प्रक्रिया के तहत की जा रही है और बोर्ड फिलहाल अपुष्ट दावों पर कोई टिप्पणी नहीं करेगा।
