नयी दिल्ली, 10 सितंबर (वार्ता) बैंकों के डिजिटल रिकार्ड को कानूनी साक्ष्य रूप में मान्यता देने वाला कानून 01 अक्टूबर से लागू हो जायेगा।
वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को एक अधिसूचना में बताया कि बैंककार बही साक्ष्य अधिनियम, 2026 इस साल 01 अक्टूबर से लागू होगा। संसद के गत मानसून सत्र में इससे संबंधित विधेयक पारित किया गया था।
इस कानून में बैंक बही-खाते के लिखित और ऐसे डिजिटल रिकार्डों को कानूनी साक्ष्य के रूप में मान्यता देने के प्रावधान हैं जो बैंक या बैंक के बाहर या क्लाउड स्टोरेज आदि कहीं भी स्टोर किए गए हों। इसने 1891 में अंग्रजों के समय बने कानून का स्थान लिया है। इसे आधुनिक डिजिटल बैंकिंग की प्रथाओं के अनुरूप बनाया गया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बताया था कि भारतीय अर्थव्यवस्था का आज जिस तेजी से डिजिटलीकरण हो रहा है उसे देखते हुए नया कानून जरूरी हो गया था। इसमें बैंक की बही की प्रमाणित प्रति को भी कानूनी साक्ष्य के रूप में मान्यता देने के प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि इस विधेयक में बैंकों की बही को साक्ष्य के रूप में मान्यता देने के प्रावधान प्रौद्योगिकी-निरपेक्ष हैं। डिजिटल रिकार्ड की प्रमाणित प्रति के मानकीकरण के प्रावधान किए गए हैं, बैंकों के अधिकारियों के सांविधिक अधिकार बढ़ाए गए हैं, उन्हें ऐसे मामलों में साक्ष्य के लिए बुलाने से पहले न्यायालय को ‘उचित कारण’ बताने होंगे जिनमें बैंक सीधे एक पक्ष नहीं होगा।
साथ ही इस कानून में बैंक की बही की परिभाषा का विस्तार किया गया है। यह बही बैंक के कार्यालय, कार्यालय के बाहर , लिखित या डिजिटल रूप में , डाटा स्टोरेज में या क्लाउड कहीं भी रखी हो सकती है। बैंक लेन-देन संबंधी इलेक्ट्रानिक रिकार्ड को भी अब साक्ष्य के रूप में मान्यता दिलाने का प्रावधान किया गया है।
