
सिंगरौली । एनसीएल परियोजना जयंत के सीडब्ल्यूएस दफ्तर के सामने बीती रात मोटरसाइकिल सवार युवक कोल वाहन टेलर के टक्कर से घायल हो गया। गंभीर अवस्था में उपचार के लिए नेहरू शताब्दी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, लेकिन युवक की मौत हो गई। युवक के परिजनों का आरोप है कि नेहरू चिकित्सालय में समय से उपचार शुरू नही हुआ। इसी बात को लेकर आज दोपहर तक जमकर हंगामा हुआ।
दरअसल चितरंगी थाना क्षेत्र के ग्राम बगैया निवासी विजय तिवारी पिता रामभवन तिवारी उम्र 38 वर्ष एक औद्योगिक कंपनी के अधीन लार्जेस्टिंग कंपनी में कार्यरत मोटरसाइकिल वाहन क्रमांक एमपी 66 एमई 4645 में सवार होकर बीती रात झिंगुरदह से जयंत तरफ आ रहे थे कि रात करीब 8:30 बजे एनसीएल परियोजना जयंत के सीडब्ल्यूएस ऑफिस के सामने टेलर वाहन क्रमांक यूपी 64 एटी 5718 ने सामने से टक्कर मार दिया। जहां इस हादसे में विजय तिवारी घायल हो गये। आनन-फानन में उन्हें उपचार के लिए नेहरू शताब्दी चिकित्सालय जयंत में ले जाया गया, लेकिन कुछ देर बाद विजय तिवारी ने दम तोड़ दिया। विजय तिवारी के निधन के बाद परिजनों ने आरोप लगाया है कि नेहरू चिकित्सालय के चिकित्सको की लापरवाही से मौत हुई है। समय पर उपचार नही किया गया,जबकि अस्पताल में करीब 45 मिनट तक जिंदा थे और सब से बात कर रहे थे। इसी बात को लेकर आज पूरे दिन शाम 4 बजे तक नेहरू चिकित्सालय परिसर में मृतक के परिजन एवं अन्य लोग विभिन्न मांगों को लेकर हंगामा करते रहे। पुलिस एवं प्रशासन के समझाइस के बाद किसी तरह मामला शांत हुआ। इस दौरान विंध्यनगर टीआई अर्चना द्विवेदी, तहसीलदार सविता यादव, जयंत चौकी प्रभारी पवन सिंह व अन्य मौजूद रहे।
8 के बदले 12 घंटे ड्यूटी,कर्मचारियों में आक्रोश
सड़क हादसे का शिकार हुये युवक के मौत के बाद एके लॉर्जिस्टिक कंपनी का स्टाफ भी नेहरू चिकित्सालय पहुंच गया। इस दौरान कंपनी के संविदा कर्मियों का आरोप है कि 8 घंटे के स्थान पर 12 घंटे ड्यूटी करनी पड़ती है। विरोध करने पर कंपनी के अधिकारी अभद्र व्यवहार कर कंपनी से बाहर करने की धमकी देते हंै। गड़ाखाड़ हादसे के बाद कलेक्टर ने उपखंड अधिकारियों के नेतृत्व में जांच टीम बनाया था, लेकिन जांच कहां हुुई, उसका क्या नतीजा निकला , किसी को पता नही चला। आरोप यहां तक है कि सब कुछ फाईलों में दफन हो गया।
परिजनों ने लगाया चिकित्सको पर लापरवाही का आरोप
मृतक विजय तिवारी के परिजनों का आरोप है कि नेहरू शताब्दी चिकित्सालय में चिकित्सको की लापरवाही से मौत हुई है। अस्पताल लाने के करीब 45 मिनट तक जिंदा थे और यहां तक कि विजय तिवारी बातचीत भी कर रहे थे। पहले तो चिकित्सक दिखे नही और भर्ती भी नही किये। विजय तिवारी को समय पर इलाज मिला होता तो उनकी जान बच सकती थी। परिजनों ने नेहरू चिकित्सालय के चिकित्सको के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग पर अड़े रहे। उनका कहना है कि ऐसे लापरवाह चिकित्सको के विरूद्ध कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही मृतक के आश्रित बेटे को कंपनी में नौकरी, पढ़ाई-लिखाई का खर्च एवं मुआवजे की मांग की गई है।
