
ग्वालियर। गणेश महोत्सव के नजदीक आते ही मूर्तिकारों की कार्यशालाओं में दिन-रात काम चल रहा है। इस वर्ष गणेशोत्सव पर सिर्फ धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि एक गहरा सामाजिक संदेश भी देखने को मिलेगा। मूर्तिकारों द्वारा तैयार की जा रही ‘श्री शिव-गणेश पूजन’ स्वरूप की प्रतिमाएं इस बार विशेष चर्चा में हैं।
मूर्तिकारों ने बताया कि आधुनिक दौर में लोग अपने माता-पिता के योगदान और उनके प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भूलते जा रहे हैं। इसी भटकाव को दूर करने और सनातन परंपरा की याद दिलाने के लिए प्रथम पूज्य गणेश जी का माता-पिता का पूजन करता हुआ स्वरूप तैयार किया गया है।
इसी क्रम में शासन-प्रशासन के दिशा-निर्देशों और व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इस विशेष स्वरूप की प्रतिमाओं का निर्माण केवल 8 फीट तक की ऊंचाई में ही किया गया है। मिट्टी और सांचों से आकृति ले चुकीं ये प्रतिमाएं अब कुछ ही दिनों में अपने मूल स्वरूप में आ जायेंगी और आने वाले 2 से 3 दिनों में रंग-रोगन और श्रृंगार का काम पूरा कर इन्हें भक्तों के लिए अंतिम रूप दे दिया जाएगा l
