
जबलपुर। हाई कोर्ट ने प्रोबेशन अवधि में कर्मचारियों को 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन देने की राज्य सरकार की व्यवस्था को असंवैधानिक ठहराते हुए निरस्त कर दिया है। फैसला आते ही सरकारी महकमों में खुशियों की लहर है। साल 2019 से 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन के कानून की बेडिय़ों में जकड़े कर्मचारियों के चेहरों पर मुस्कान बिखर गई है। जबलपुर हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद प्रदेश भर के सरकारी कर्मचारियों में जश्न, राहत और भारी उत्साह का माहौल है। शासकीय स्कूलों में कर्मचारियों ने जश्न तक मनाया। ऐतिहासिक जीत की बधाई भी दी गई। जबलपुर समेत भोपाल, इंदौर, ग्वालियर सहित कई जिला मुख्यालयों और स्कूलों में कर्मचारियों ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया और पटाखे फोडक़र अपनी खुशी का इजहार किया। ढोल नगाड़े तक बजे। फैसले को लेकर कर्मचारी संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई साथ ही उन्होंने खुशी जताने के साथ ही सरकार से मांग की है कि वह फैसले का जल्द ही लागू किया जाये। कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि हाईकोर्ट का फैसला नीतिगत मामला है। न्यायालय से न्याय मिला है यह जीत एकजुटता का नतीजा है। अब सरकार को इसे लागू करने में देरी नहीं करना चाहिए।
इनका कहना है
हाईकोर्ट का फैसला नीतिगत है। कोर्ट के फैसले को सरकार कब तक लागू करती है यह देखने की बात है। न्यायालय के आदेश का पालन करने में सरकार काफी देरी करती है पूर्व में भी कई फैसले हुए लेकिन आज दिनांक तक बहुत से निर्णय पर पालन नहीं हो पाया है। सरकार की मंशा पर भी सवाल लगातार उठ रहे हैं। कोर्ट के फैसले पर खुशी की लहर है।
उमाशंकर पटेल, प्रांतीय शिक्षक संघ
कामगार को उसकी पूरी तनख्वाह मिलनी चाहिए चाहे वह प्रोविजन पीरियड में हो या रेगुलर जो जिस पद का काम कर रहा है उसे उसे पद की पूरी तनख्वाह मिलनी चाहिए।
उत्तम विश्वास, कर्मचारी नेता
न्यायालय से आखिरकार कर्मचारियों को न्याय मिला है, जिसका हम हृदय से स्वागत करते हैं। लेकिन मेरा स्पष्ट मानना है कि सरकार को ऐसे नियम बनाने ही नहीं चाहिए, जिनमें बार-बार सुधार की नौबत आए और कर्मचारियों को अपनी मांगों को लेकर परेशान न होना पड़े। न्यायालय से न्याय मिला है अब सरकार को शीघ्र ही इसका लाभ देना चाहिए।
भरत पटेल, प्रांताध्यक्ष आजाद अध्यापक शिक्षक संघ
